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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हनवां1एपिसोड

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प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन

पूर्व जन्म में, रिया शर्मा और उसकी सहेली रोशनी वर्मा की विवाह के दिन ससुराल वालों और विक्रम सिंघानिया के षड्यंत्र में मृत्यु हो जाती है। पुनर्जन्म पाकर रिया अपनी शादी से पहले रोशनी को सुरक्षित भेज देती है और मामा राकेश शर्मा को बुलाती है। रिया की ननद जाह्नवी गलती से कमरे में जाती है, जहाँ विक्रम उसे रोशनी समझकर दुर्व्यवहार करता है। पति चिराग और सास कमला जाह्नवी को रोशनी समझकर रिया को प्रताड़ित करते हैं। मामा के आने पर सच खुलता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शादी से खून तक का सफर

शादी की खुशियां अचानक खून से रंग गईं जब रिया शर्मा ने कमरे में रोशनी वर्मा को बेहोश देखा। चिराग मल्होत्रा का चेहरा देखने लायक था क्योंकि वह कुछ भी नहीं कर पाया। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन ने दिखाया कैसे प्यार नफरत में बदल सकता है। कमला मल्होत्रा की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था और दर्शकों को झकझोर दिया।

विक्रम का असली चेहरा

विक्रम सिंहानिया की मुस्कान में छिपा था असली राज जो बाद में खुला। रिया शर्मा ने जब चाकू उठाया तो लगा कि अब वह बदला लेगी। लेकिन अंत में वह खुद जख्मी होकर फर्श पर गिर गई। समय के साथ खेलना इस कहानी का मुख्य हिस्सा है। घड़ी की सुइयां रुक गईं पर कहानी नहीं रुकी। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में सस्पेंस बना हुआ है।

जाहवी की मासूमियत का राज

जाहवी मल्होत्रा की मासूमियत के पीछे छिपा था गहरा षड्यंत्र जो किसी को पता नहीं था। लाल रंग की सजावट अब खून जैसी लग रही थी सभी को। रिया शर्मा की आंखों में डर साफ दिख रहा था उस वक्त। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन की कहानी हर मोड़ पर चौंकाती है। कोई भी भरोसेमंद नहीं लग रहा था इस घर में। सबके चेहरे बदलते गए धीरे धीरे।

काव्या का संदिग्ध किरदार

काव्या दास की मौजूदगी भी संदेह के घेरे में थी सभी के लिए। चिराग मल्होत्रा अपनी ही दुल्हन को नहीं बचा पाया उस वक्त। बिस्तर पर पड़ी लाश ने सबकी सांसें रोक दीं एक पल के लिए। यह कहानी गहन भावनाओं से भरी हुई है पूरी तरह। हर किरदार की अपनी मजबूरी थी जो सामने आई। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन बहुत प्रभावशाली है।

शीशे में छिपा सच

शीशे में रिया शर्मा ने खुद को देखा तो हैरान रह गई बहुत ज्यादा। क्या यह सब एक बुरा सपना था या हकीकत कोई नहीं जानता। विक्रम सिंहानिया की चालाकी देखकर गुस्सा आता है मन में। प्रतिशोध: एक अधूरी दुल्हन में सस्पेंस बना हुआ है लगातार। अंत तक पता नहीं चलता कि सच क्या है यहाँ। दर्शक को बांधे रखने की ताकत है इसमें।

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