यह दृश्य सच में दिल को छू लेने वाला है। जब महारानी अपने बच्चे का हाथ थामे चलती है, तो आंखों में एक अलग ही चमक है। पुनर्जन्मी महारानी की वापसी में ऐसा लगता है कि वह अतीत के दर्द को भूलकर भविष्य के लिए लड़ रही है। बच्चे का रोना और फिर उसका सहारा पाकर चुप हो जाना बहुत प्यारा लगा। मां का प्यार ही सबसे बड़ी ताकत है जो किसी भी मुसीबत का सामना करा सकती है। यह चित्रण शैली भी बहुत सुंदर है और दर्शकों को बांधे रखती है।
जब उसने मुखौटा पहना और कहा कि जियांग चुफेंग और लिन रुयी के दिन गिने गए हैं, तो रोंगटे खड़े हो गए। पुनर्जन्मी महारानी की वापसी की कहानी में बदला लेने का जज्बा साफ झलकता है। उसकी आंखों में गुस्सा और आंसू दोनों थे जो किसी तूफान की पूर्व सूचना दे रहे थे। महल के बीचोंबीच खड़ी होकर उसने जो ठान लिया है, वह जरूर पूरा करेगी। ऐसे किरदार दर्शकों को बहुत पसंद आते हैं जो चुपचाप नहीं बैठते और अपने हक के लिए लड़ते हैं।
खून से सने उस दृश्य ने रूह कंपा दी। पीले वस्त्रों वाला व्यक्ति इतना क्रूर कैसे हो सकता है यह सोचकर ही डर लगता है। पुनर्जन्मी महारानी की वापसी में दिखाया गया यह अतीत दृश्य सब कुछ स्पष्ट करता है कि वह इतनी कठोर क्यों हो गई है। बच्चे के सिर पर हाथ रखकर वह उसे सांत्वना दे रही थी लेकिन अंदर से आग उगल रही थी। यह विरोधाभास बहुत गहरा था और कहानी को नया मोड़ देता है।
महल की वास्तुकला और पृष्ठभूमि बहुत विस्तृत है। लाल दीवारें और सुनहरी छतें राजसी ठाठ को दर्शाती हैं। पुनर्जन्मी महारानी की वापसी के हर दृश्य में कलाकारों की मेहनत साफ दिखती है। जब वह बच्चे को गोद में उठाकर चलती है तो उसकी साड़ी हवा में लहराती है जो बहुत चलचित्र जैसा लगता है। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है क्योंकि इनमें एक अलग ही जादू है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
आंसू पीकर मुस्कुराना सबसे कठिन काम होता है। उसकी आंखों से टपकते आंसू और कसकर भींचे हुए होंठ दर्द की गहराई बता रहे थे। पुनर्जन्मी महारानी की वापसी में भावनाओं को इतनी बारीकी से दिखाना आसान नहीं है। वह जानती है कि कमजोर पड़ने का मतलब है सब कुछ खो देना। इसलिए उसने अपने आप को ढाल बना लिया है। यह संघर्ष हर किसी को अपना लगा और दिल पर गहरा असर छोड़ गया।