माथादेवी ने जब कहा कि अमित तीन बार करे और तलवार मुड़े, तो लगा जैसे वह पहले से जानती थी क्या होने वाला है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर शब्द के पीछे एक योजना है।
राहुल कुछ नहीं बोला, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ कह रही थीं। जब वह बोला कि 'हम होते तो इसे हमारा पहरेदार भी नहीं बनाते', तो लगा जैसे वह अपने आप से लड़ रहा हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे किरदार ही कहानी को जिंदा रखते हैं।
लाल कालीन पर गिरे खून के निशान सिर्फ रंग नहीं, बल्कि दर्द की कहानी कह रहे थे। जब अमित गिरा और उसने अपना हाथ पकड़ा, तो लगा जैसे वह अपनी ही कमजोरी से लड़ रहा हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
चौहान जी का चेहरा जब बदला, तो लगा जैसे पूरा परिवार टूट गया हो। उनकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि निराशा थी। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर किरदार के पीछे एक दर्दनाक इतिहास छिपा है।
अमित की तलवार जब मुड़ी, तो लगा जैसे हवा भी रुक गई हो। उसकी हर चाल में एक अजीब सी लय थी, जैसे वह पहले से जानता था कि क्या करना है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे एक्शन सीन देखकर लगता है कि हर झटका एक कहानी कहता है।