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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताजवां50एपिसोड

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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताज

माता-पिता की खोज में विक्रम पहाड़ से उतरा। जेड ताबीज़ लेकर वह योद्धाओं की दुनिया में आया। शक्तिनगर में अंजलि चौहान को राठौरों से बचाया, दोनों परिवारों के झगड़े में फंस गया। चौहान परिवार में पता चला कि सीमा उसकी माँ है, ताबीज़ से उसका नाता। पिता राजेश ने उसे 'निकम्मा' कहा। माँ सीमा और बहन प्रिया पर खतरा आया तो उसने ताकत छिपाना छोड़ा, परिवार की रक्षा को लड़ने का संकल्प लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शक्ति का अहंकार और पतन

बूढ़े विलेन की मुस्कान में जो घमंड है, वह सच में डरावना है। उसने न केवल युवा योद्धा की ताकत छीनी, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी कुचल दिया। जब वह कहता है कि अब वह बेकार इंसान है, तो लगता है कि उसने सब कुछ जीत लिया है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज की कहानी में यह सबसे काला अध्याय लगता है। गुरु का आना और फिर चले जाना एक नई उम्मीद जगाता है, लेकिन दुश्मन की ताकत अभी भी बनी हुई है।

रक्त और आंसुओं का संगम

लड़के के मुंह से खून बहना और उसकी आंखों में हार का दर्द देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वह लड़ना चाहता था, लेकिन उसकी ताकतें समाप्त हो चुकी थीं। बहन की बेबसी और गिड़गिड़ाहट इस दृश्य को और भी दर्दनाक बना देती है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे सीन देखकर लगता है कि नायक का पतन कितना भयानक हो सकता है। दुश्मन का मजाक उड़ाना और गुरु का चुपचाप देखना एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।

गद्दार गुरु और टूटे सपने

जब सफेद बालों वाला व्यक्ति आता है, तो लगता है कि रक्षक आ गया है, लेकिन उसकी बातें सुनकर पता चलता है कि वह भी उसी दुश्मन का साथी है। 'तबसे तुम मेरे भाई नहीं रहे' यह डायलॉग दिल को झकझोर देता है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में विश्वासघात की यह परत बहुत गहरी है। युवा योद्धा का अकेले पड़ जाना और दुश्मन का अपनी जीत का जश्न मनाना भविष्य के लिए बड़ी चुनौती खड़ी करता है।

अंधेरे में एक किरण

हालांकि युवा योद्धा बुरी तरह हार गया है और उसकी नसें टूट चुकी हैं, लेकिन गुरु का आना एक नई उम्मीद की किरण है। दुश्मन सोचता है कि उसने सब खत्म कर दिया, लेकिन गुरु की मौजूदगी बताती है कि खेल अभी बाकी है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह मोड़ बहुत रोमांचक है। बहन का रोना और भाई का दर्द देखकर लगता है कि बदला लेने की आग अभी बुझी नहीं है। दुश्मन की हंसी जल्द ही आंसुओं में बदल सकती है।

क्रूरता की हदें पार

दुश्मन का युवा योद्धा को नीचा दिखाना और उसे बेकार इंसान कहना सच में सहन करने लायक नहीं है। उसने न केवल शारीरिक रूप से तोड़ा है, बल्कि मानसिक रूप से भी कुचल दिया है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में विलेन का यह रूप बहुत खतरनाक है। जब गुरु आता है और दुश्मन की ताकत को पहचानता है, तो लगता है कि सामने बहुत बड़ी चुनौती है। बहन की आंखों में आंसू और भाई की बेबसी इस दृश्य को यादगार बना देती है।

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