पिता का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। उन्होंने तलवार मेज पर मारी और धमकी दी कि अगर किसी ने उस लड़के को पहचाना, तो सबको घर से निकाल देंगे। ये कैसा पिता है जो अपने ही खून को स्वीकार नहीं करता? शायद उसे किसी बात का डर है या फिर कोई पुराना वादा। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज की ये कहानी हर मोड़ पर नया ट्विस्ट देती है। उस माँ की बेबसी देखकर दिल भारी हो गया।
सफेद कपड़ों वाले लोग उस युवक का मजाक उड़ा रहे थे, उसे 'कसाई' कहकर बुला रहे थे। लेकिन जब उसने अपनी तलवार चलाई और उस अटूट पत्थर को चीर दिया, तो सबकी बोलती बंद हो गई। ये दृश्य बताता है कि हुनर कपड़ों या हैसियत से नहीं, बल्कि कर्म से पहचाना जाता है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे सीन्स देखकर मजा आ जाता है। उसकी तलवारबाजी कमाल की थी!
जब माँ ने कहा कि वो मणि उसने खुद बनाई थी, तो उसकी आवाज में जो कांप थी, वो एक माँ के दर्द को बयां कर रही थी। उसे यकीन था कि वो लड़का उसका बेटा है, लेकिन पिता ने उसे चुप रहने को मजबूर कर दिया। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर मायूसी देखकर बहुत बुरा लगा। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज के इस ड्रामे में एक्टिंग जबरदस्त है। काश वो लड़का सच में उनका बेटा होता।
सफेद लिबास पहने वो लोग खुद को बहुत बड़ा समझ रहे थे, लेकिन उस 'कसाई' ने एक वार में ही उनका अहंकार चूर-चूर कर दिया। उस पत्थर को तोड़ना नामुमकिन था, फिर भी उसने कर दिखाया। ये साबित करता है कि असली ताकत दिखावे में नहीं, हुनर में होती है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी तलवारबाजी देखकर सब हैरान रह गए।
पिता का व्यवहार बहुत संदिग्ध है। वो क्यों नहीं चाहता कि उस लड़के को पहचाना जाए? शायद उसे किसी बड़े खतरे का अंदेशा है या फिर कोई पुराना पाप छुपा है। माँ की बेबसी और बेटी का सवाल, सब कुछ इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि ये कहानी अभी बहुत आगे जाने वाली है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज का हर एपिसोड नया सवाल खड़ा करता है। ये रहस्य सुलझता नहीं जा रहा।