राहुल की माँ की आँखों में 20 साल का इंतज़ार साफ दिख रहा था। जब खलनायक ने राहुल को निकम्मा कहा, तो माँ का दिल टूट गया। लेकिन राहुल ने साबित कर दिया कि वह चौहान परिवार का नहीं, बस अपनी माँ और बहन का बेटा है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह पारिवारिक नाटक दिल को छू गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सुकून देता है।
खलनायक का हवा में उड़कर हमला करना और राहुल का उसे हवा में ही रोक देना, यह दृश्य सिनेमाई जादू था। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे दृश्य प्रभाव देखकर लगता है कि बजट कम नहीं था। राहुल की आँखों में वह आत्मविश्वास था जो बता रहा था कि अब खेल बदलने वाला है। खलनायक की हंसी अब डर में बदल चुकी थी।
खलनायक ने कहा कि चौहान परिवार पर नज़र लग गई है, यह एक श्राप है। लेकिन राहुल ने साफ कर दिया कि वह इस परिवार का हिस्सा नहीं है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह संवाद बहुत शक्तिशाली था। जब राहुल ने कहा कि वह सिर्फ अपनी माँ और बहन के लिए लड़ रहा है, तो पूरा माहौल बदल गया।
राहुल ने खुद को कसाई कहा, लेकिन उसके हाथ में तलवार देखकर सबकी सांसें रुक गईं। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। खलनायक ने मज़ाक उड़ाया, लेकिन अंत में उसे ही मुंह की खानी पड़ी। राहुल की शैली और संवाद अदायगी लाजवाब थी। नेटशॉर्ट पर ऐसे किरदार देखना मज़ा देता है।
राहुल की बहन के चेहरे पर चोट के निशान थे, लेकिन उसकी आँखों में भाई के लिए चिंता थी। जब उसने राहुल से जाने को कहा, तो दिल दहल गया। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह बहन-भाई का बंधन बहुत प्यारी लगी। राहुल ने कहा 'चिंता मत करो', और फिर जो हुआ वह इतिहास बन गया।