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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँवां57एपिसोड

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(डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ

महान झोउ के सम्राट रुद्रसिंह ने हूणों को हराकर सारे राज्य जीत लिए। उसे 'तारा खान' कहा गया। पर सत्ता के मोह में उसने अपनी रानी खो दी, फिर सब छोड़कर पुत्र संग सरयू नगर में रहने लगा। एक दिन वफ़ा राज्य की महारानी चंद्रावती, जिसका पीछा दुश्मन कर रहे थे, उसकी झोपड़ी में आ निकली। अनजाने में दोनों के बीच एक रात का संबंध बन गया। रुद्रसिंह का शांत जीवन हमेशा के लिए बदल गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गलतफहमी का खेल

इस दृश्य में विशाल की घबराहट साफ दिख रही है जब उसने धर्म पिता को सब समझाने की कोशिश की। लगा कि सच सामने आ जाएगा क्योंकि (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं। दरबार का माहौल तनावपूर्ण था, पर अंत में सब ठीक हो गया। पात्रों के बीच का संवाद बहुत तेज था और दर्शकों को बांधे रखता है। विशाल का बचाव देखकर हंसी भी आती है और गुस्सा भी।

रिश्तों का खुलासा

जब विशाल ने बताया कि वह रिश्ता धर्म माता का है, तो सबके होश उड़ गए। यह सीन दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी गलतफहमी बड़ा रूप ले सकती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में यह पल बहुत अहम है। धर्म पिता और धर्म माता का प्यार साफ झलकता है। पीछे खड़े लोग भी हैरान थे। यह नाटक देखने में बहुत मजेदार लग रहा है।

विशाल की सफाई

विशाल ने बड़ी मुश्किल से सबको समझाया कि उसने जानबूझकर नहीं मारा। उसका कहना था कि उसे पहले से पता नहीं था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे हास्य सीन बहुत अच्छे लगते हैं। उसने कहा कि वह उनकी खुशी नहीं छीन सकता। यह बात सुनकर धर्म पिता का गुस्सा शांत हो गया। संवादों की डबिंग भी बहुत प्रभावशाली है।

दरबार का नज़ारा

पूरा दरबार इस बहस को देख रहा था। लाल पोशाक में खड़े लोग चुपचाप तमाशा देख रहे थे। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की सेट सजावट बहुत शानदार हैं। पीछे की सजावट और कपड़े राजसी लग रहे हैं। जब प्रधानमंत्री का जिक्र हुआ तो सबकी निगाहें बदल गईं। यह दृश्य कहानी को आगे बढ़ाता है और नए राज खोलता है।

प्यार का इज़हार

धर्म पिता ने साफ कर दिया कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं। यह सुनकर विशाल राहत की सांस लेता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है। पीले कपड़े वाले व्यक्ति ने सबको खाने का न्यौता दिया। यह अंत बहुत सुखद था। ऐसे परिवारिक झगड़े और सुलह देखना अच्छा लगता है।

प्रधानमंत्री का एंट्री

जब प्रधानमंत्री विष्णुनाथ के बेटे का जिक्र हुआ, तो माहौल बदल गया। सबको लगा कि यह कोई बड़ा राज है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में हर किरदार की अहमियत है। लाल पोशाक वाले ने पूछा कि पिताजी ने क्यों नहीं बताया। यह सवाल कहानी में नई उलझन पैदा करता है। दर्शक अब अगली कड़ी का इंतजार करेंगे।

कॉमेडी और ड्रामा

मारने की वजह जानकर सब हैरान रह गए। विशाल का बचाव बहुत मजेदार था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में गंभीर बातों को भी हंसी में बदल दिया गया है। उसने कहा कि वह मूर्ख नहीं है। धर्म माता की मुस्कान देखकर लगा कि सब ठीक है। यह शो देखने में हल्का फुल्का लेकिन दिलचस्प है।

वेशभूषा और सजावट

पात्रों के कपड़े बहुत रंगीन और आकर्षक हैं। पीले और हरे कपड़ों का मेल अच्छा लग रहा है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ के दृश्य बहुत प्यारे हैं। दरबार की सजावट में लाल पर्दे और दीये जल रहे हैं। यह माहौल त्योहार जैसा लग रहा था। जब सबने खाने की बात की तो खुशी बढ़ गई।

गलतफहमी का अंत

आखिरकार यह साफ हो गया कि यह एक गैर गलतफहमी थी। विशाल ने राहत की सांस ली। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ बार बार आते हैं। धर्म पिता ने विशाल को रोककर रस्में देखने को कहा। यह दिखाता है कि वे उसे अपना मानते हैं। परिवार के बंधन इस शो की खासियत हैं।

खाने का निमंत्रण

अंत में सबने साथ में खाना खाने का फैसला किया। यह बात सुनकर विशाल खुश हो गया। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में खाने के सीन भी अहम हैं। धर्म पिता ने कहा कि रुककर रस्में देख लो। यह संवाद बहुत प्यारा था। सभी पात्रों के बीच का तालमेल बहुत अच्छा दिखाया गया है।