इस दृश्य में महारानी का साहस देखकर हैरानी हुई। उसने बीच बाजार उस व्यक्ति को गले लगा लिया और शादी की जिद की। वह व्यक्ति तो बस हैरान रह गया। उसे लगा कि यह मजाक है। लेकिन कहानी में मोड़ आता है जब वह अपनी मजबूरी बताती है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। भीड़ की प्रतिक्रिया भी कमाल की थी। सब शादी शादी चिल्ला रहे थे। मजाकिया अंदाज बहुत पसंद आया। दर्शकों को यह पसंद आएगा।
रुद्र सिंह का बहाना सुनकर हंसी आ गई। उसने कह दिया कि वह उसकी बेटी की उम्र की है। फिर भी वह महिला नहीं मानी। उसने पूछा कि क्या तुम्हारा बेटा भी है। यह संवाद बहुत पैने थे। राजनीति के चलते उसे यह कदम उठाना पड़ा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में यह उम्र का अंतर एक बड़ी रुकावट बन गया है। पर लगता है आगे चलकर यह रिश्ता गहरा होगा। देखना दिलचस्प होगा कि वह कैसे मानता है। सबको इंतजार है।
कहानी में प्रधानमंत्री विश्वनाथ का जिक्र आता है। महारानी अकेली पड़ गई है दरबार में। उसे वारिस की जरूरत है वरना सल्तनत कमजोर हो जाएगी। इसलिए उसने यह नाटक रचा। रुद्र सिंह को भी पता चल गया कि वह विश्वनाथ को जानता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में राजनीति का यह खेल बहुत गहरा है। विश्वास किसी पर नहीं है। यह उदासी महारानी की आंखों में साफ दिख रही थी। बहुत भावुक दृश्य था। दिल को छू गया।
दोनों के बीच की बातचीत बहुत गंभीर हो गई। उसने मदद मांगी भले ही झूठी शादी कर ले। वह व्यक्ति मना कर रहा था पर फिर भी सोच में पड़ गया। उसे दर्द का बहाना भी किया। यह हास्य स्पर्श अच्छा लगा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे मोड़ आते हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। अब वह उसे कैसे मनाएगी यह देखना बाकी है। उनकी लगाव धीरे धीरे बन रही है। कहानी आगे बढ़ेगी।
महारानी ने बताया कि उसे आजादी नहीं मिलती। सब उसे सिर्फ एक पद की तरह देखते हैं। अपनी दुख भी नहीं कह सकती। यह संवाद बहुत भारी था। रुद्र सिंह को इसका अहसास हुआ। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में पात्रों की गहराई को दिखाया गया है। वह ताकतवर होने के बावजूद अकेली है। यह विरोधाभास बहुत अच्छे से लिखा गया है। दर्शक को इससे सहानुभूति होती है। बहुत पसंद आया।
शुरू में जब वह उसे गले लगी तो सब हैरान थे। एक व्यक्ति ने पूछा कि तुमने इसे कब फंसाया। यह संवाद बहुत हास्यप्रद था। भीड़ शादी के नारे लगा रही थी। माहौल बहुत हल्का फुल्का था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे हंसी मजाक के दृश्य भी हैं। इससे कहानी बोरिंग नहीं होती। लोगों की उत्सुकता देखने लायक थी। सब कुछ जानना चाहते थे। मजा आ गया।
रुद्र सिंह ने माना कि वह विश्वनाथ को जानता है। यह बात महारानी के लिए चौंकाने वाली थी। वह सबसे ताकतवर इंसान है। अब खेल और भी पेचीदा हो गया है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में खलनायक का प्रवेश की तैयारी हो रही है। क्या वह व्यक्ति उसकी मदद कर पाएगा। यह सवाल दिमाग में आ रहा है। रहस्य बना हुआ है। आगे क्या होगा।
वहां खड़ी लड़की सब देख रही थी। उसे लगा कि यह दीवानापन है। वह हैरान थी कि महारानी सौतन बनने को तैयार है। उसका चेहरा देखकर लगा कि वह कुछ सोच रही है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में तीसरे पात्र का भी महत्व है। वह आगे चलकर क्या भूमिका निभाएगी। यह भी एक राज है। सब कुछ स्पष्ट नहीं है अभी। देखना बाकी है।
दोनों ने बात करने के लिए नाव का रास्ता चुना। वहां शांति थी। चाय पीते हुए बातें हुईं। उम्र का फर्क फिर सामने आया। उसने कहा वह चालीस साल का है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे शांत पल भी हैं। जहां पात्र अपने दिल की बात कहते हैं। यह दृश्य बहुत सुकून देने वाला था। पृष्ठभूमि भी अच्छी लगी। बहुत सुंदर लगा।
अंत में वह व्यक्ति मदद करने से मना कर रहा था। पर महिला ने उसका हाथ पकड़ लिया। उसे दर्द होने लगा। यह नाटक था या सच। अब कहानी में नया मोड़ आएगा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की अगली कड़ी देखने की उत्सुकता बढ़ गई है। क्या वह राजी हो जाएगा। यह जानना जरूरी है। कहानी बहुत रोचक हो गई है। सबको पसंद आएगी।