इस नाटक में हास्य का तड़का बहुत बढ़िया है। जब वह तकिए के पीछे छिपता है तो हंसी नहीं रुकती। चाचा का चेहरा देखने लायक है। उम्र को लेकर जो बहस होती है वह कमाल की है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं। लाल पोशाक में नायिका बहुत सुंदर लग रही हैं। उनका भरोसा और साहस प्रशंसनीय है। यह दृश्य मनोरंजन से भरपूर है और दर्शकों को बांधे रखता है। हर संवाद में नया मोड़ है।
नायिका का साहस देखकर दांतों तले उंगली दब जाती है। सामने खड़े होकर चुम्बन लेना कोई मजाक नहीं है। चाचा जी हैरान रह गए। यह साबित करना कि वे सच्चे हैं, बहुत साहसी कदम था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की कहानी में ऐसा जोश भरपूर है। सफेद पोशाक वाला पात्र भी कम नहीं है। उसने तुरंत स्थिति संभाल ली। बुजुर्ग की प्रतिक्रिया ने माहौल हल्का कर दिया। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई है।
उम्र के मजाक ने पूरा माहौल बदल दिया। जब उसने कहा कि आप अस्सी के लगते हैं, तो हंसी फूट पड़ी। चाचा जी का गुस्सा और हैरानी साफ दिख रही थी। यह संवाद बाजी बहुत तेज है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे संवाद मिलना आम बात है। परिधान बहुत भव्य और रंगीन हैं। कमरे की सजावट भी राजसी लगती है। प्रकाश व्यवस्था ने दृश्य को और निखारा है। देखने में बहुत अच्छा लग रहा है।
छिपने का तरीका बहुत बचकाना लेकिन मजेदार था। हरे रंग के तकिए ने उसे बचा लिया। फिर अचानक सामने आकर सबको चौंका दिया। यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे पल बार बार आते हैं। नायक और नायिका की जोड़ी जचती है। उनकी उपस्थिति स्क्रीन पर साफ झलकती है। चाचा का किरदार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बिना उनके इसमें मजा नहीं आता।
कल शादी होने वाली है यह बात सबके लिए नई थी। चाचा को विश्वास नहीं हो रहा था। फिर भी जोड़े ने डटकर सामना किया। यह वफादारी देखकर अच्छा लगा। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है। संवाद प्रस्तुति बहुत दमदार है। हर किरदार ने अपनी भूमिका बखूबी निभाया है। पृष्ठभूमि संगीत भी सही जगह पर है। कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन कड़ी है। मुझे यह देखकर बहुत खुशी मिली।
लाल रंग की साड़ी में नायिका बहुत खूबसूरत लग रही हैं। उनके गहने और शृंगार भी लाजवाब हैं। सफेद वस्त्रों में नायक साफ सुथरे लग रहे हैं। यह दृश्य बहुत आकर्षक है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की निर्माण गुणवत्ता अच्छी है। कपड़ों की बनावट और रंग संयोजन प्रशंसनीय है। मंच सजावट भी ऐतिहासिक लगती है। हर कोने में बारीकी से काम किया गया है। दर्शकों को यह दृश्य बहुत पसंद आएगा। यह कलाकारी देखने लायक है।
संवादों में जो चुस्ती है वह कमाल की है। कोई भी बात बेमानी नहीं कही गई। हर जवाब तुरंत और सटीक है। यह लेखन कौशल दिखाता है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ की पटकथा बहुत मजबूत है। हास्य और गंभीरता का संतुलन बना हुआ है। चाचा की शंकाएं जायज थीं लेकिन जवाब भी ठोस थे। यह टकराव देखने में मजा देता है। मुझे यह अंदाज बहुत भाया है। कहानी आगे बढ़ती जाएगी।
जब उसने कहा कि मैं ही नौजवान हूं, तो चौंक गए सब। यह आत्मविश्वास सराहनीय है। फिर चाचा को जवाब देना और भी अच्छा लगा। यह किरदार निभाने वाले की काबिलियत है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे किरदार मिलते हैं। अभिनय में प्राकृतिकता है जो पसंद आती है। कोई भी हरकत बनावटी नहीं लगती। सब कुछ सहज और सरल है। यह श्रृंखला देखने में समय बिल्कुल बर्बाद नहीं होता।
रिश्तों की गरिमा को बनाए रखना मुश्किल होता है। फिर भी यहां सबने हदें पार कीं। चुम्बन वाला दृश्य बहुत साहसी था। यह साबित करने के लिए जरूरी था। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे जोखिम लिए गए हैं। नायिका ने अपनी बात मनवा ली। चाचा चुपचाप सब देखते रहे। अंत में सब ठीक हो गया। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह देखना बाकी है।
पूरा दृश्य एक नाटक की तरह लगा। हर पल कुछ नया हो रहा था। शुरू में छिपना और अंत में सामने आना। यह यात्रा बहुत रोचक है। (डबिंग) जब महारानी बनी सौतेली माँ में ऐसे पल बार बार आते हैं। दर्शक बंधे रहते हैं स्क्रीन से। कोई भी पल नीरस नहीं है। संपादन भी बहुत तेज और सटीक है। मुझे यह श्रृंखला बहुत पसंद आ रही है। मैं और देखना चाहता हूं।