जब वह सफ़ेद बीएमडब्ल्यू में बैठकर अखबार पढ़ रहा था तो लगा कि सब कुछ सामान्य है। लेकिन उसकी आँखों में छिपा दर्द कहानी का असली मोड़ था। गुलाब का बदला में हर किरदार की गहराई है। बाहर निकलते ही उसका रवैया बदल गया जैसे कोई बड़ा फैसला ले चुका हो।
उस औरत की हँसी नाश्ते की मेज़ पर झूठी लग रही थी। गुलाब का बदला में हर भावना को बारीकी से दिखाया गया है। जब वह ज़मीन पर गिर पड़ी और फिर उठकर भागी तो लगा कि उसकी ज़िंदगी में कुछ बहुत गलत हो रहा है। ऐसे पल दर्शक को बांधे रखते हैं।
बाहर खड़े तीन आदमियों की बातचीत में कुछ छिपा था। गुलाब का बदला में हर संवाद मायने रखता है। जब वह औरत भागती हुई आई और उस आदमी से टकराई तो लगा कि अब कहानी तेज़ी से आगे बढ़ेगी। हर किरदार की अपनी मजबूरी है।
जब वह औरत झाड़ू लेकर साफ़-सफ़ाई कर रही थी तो उसकी आँखों में डर साफ़ दिख रहा था। गुलाब का बदला में घर का माहौल भी एक किरदार की तरह है। जब वह ज़मीन पर गिर पड़ी तो लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। ऐसे पल दिल को छू लेते हैं।
उस आदमी का अखबार पढ़ना सिर्फ एक आदत नहीं बल्कि एक छलावा था। गुलाब का बदला में हर छोटी चीज़ का मतलब है। जब उसने कार से उतरकर कोट ठीक किया तो लगा कि वह किसी बड़े मिशन पर निकल पड़ा है। ऐसे पल दर्शक को हैरान कर देते हैं।