एरेना का वो नज़ारा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब वो अकेला सभी के बीच खड़ा था, तो लगा जैसे मौत सामने हो। लेकिन फिर जो हुआ, वो किसी चमत्कार से कम नहीं था। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट में ऐसे सीन देखने को मिलते हैं जो दिल की धड़कन बढ़ा दें। उसकी आँखों में वो नीली चमक देखकर ही समझ आ गया कि अब खेल पलटने वाला है। सस्पेंस बनाए रखने का तरीका लाजवाब है। हर पल की उम्मीद बनी हुई थी।
ऊपर बैठे वो अमीर लोग इंसान नहीं, दरिंदे लग रहे थे। वो शर्त लगा रहे थे और हँस रहे थे, जबकि नीचे मौत तांडव मचा रही थी। उस लड़की की चीखें सुनकर दिल दहल गया। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट की कहानी में ये दिखाया गया है कि कैसे पैसा इंसानियत को खा जाता है। नायक की ताकत का असली इस्तेमाल अब शुरू हुआ है। यह दृश्य बहुत ही भयावह था।
एक्शन सीन्स की कोरियोग्राफी बहुत जबरदस्त थी। जब वो राक्षसों से घिर गया था, तो लगा अब सब खत्म। लेकिन अचानक जो ऊर्जा फूटी, उसने सबको हवा में उड़ा दिया। विजुअल इफेक्ट्स पर कोई समझौता नहीं किया गया है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट देखने का अनुभव नेटशॉर्ट पर बहुत ही शानदार रहा। हर फ्रेम में एक नया रोमांच है। तकनीक का उपयोग बहुत अच्छा है।
उस बूढ़े व्यक्ति ने जब लाल बटन दबाया, तो स्क्रीन के सामने बैठे मेरी साँसें रुक गईं। इतनी बेरहमी से किसी को मौत के मुँह में धकेलना आसान नहीं होता। पर हीरो ने साबित कर दिया कि वो अकेला ही काफी है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट में पावर डायनामिक्स का खेल बहुत गहरा है। कौन जीतेगा, ये कहना मुश्किल है। निर्देशक की सोच काबिले तारीफ है।
वो सुनहरे बालों वाली लड़की क्यों भाग रही थी? शायद वो उसे बचाना चाहती थी। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था। इमोशनल एंगल इस एक्शन शो की जान है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट में सिर्फ़ लड़ाई नहीं, जज़्बात भी बराबर की लड़ाई लड़ते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ और रोचक होगी। रिश्तों की अहमियत यहाँ दिखती है।
राक्षसों का डिज़ाइन काफी डरावना और यथार्थवादी था। उनके नाखून और दाँत देखकर ही घबराहट होती है। ऐसे माहौल में लड़ना कोई मज़ाक नहीं है। हीरो की हिम्मत की दाद देनी पड़ती है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट की दुनिया बहुत खतरनाक लग रही है। हर मोड़ पर मौत घात लगाए बैठे है। क्रिएटिव टीम ने कमाल कर दिया।
जब उसकी माथे पर नीली नसें उभर आईं, तो समझ गया कि असली ताकत जाग गई है। ये ट्रांसफॉर्मेशन सीन सिनेमाई लिहाज से बहुत सटीक था। आँखों का नीला होना किसी श्राप या वरदान जैसा लग रहा था। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट में सुपरनैचुरल एलिमेंट्स का इस्तेमाल बहुत खूबसूरती से किया गया है। जादुई शक्तियों का प्रदर्शन शानदार है।
भीड़ का शोर और कोलोसियम का माहौल बिल्कुल असली लग रहा था। हजारों लोग तमाशा देख रहे थे, किसी को परवाह नहीं थी। ये सामाजिक टिप्पणी बहुत गहरी है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट सिर्फ़ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि एक आईना भी है। विलेन की हंसी अब रोने में बदल गई है। समाज की बर्बरता को दिखाया गया है।
अंत में जब सभी दुश्मन हवा में उड़ गए, तो तालियाँ बजाने को मन किया। ये क्लाइमेक्स उम्मीद से भी ज्यादा धमाकेदार था। अब सवाल ये है कि अगले एपिसोड में क्या होगा। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट के फैंस के लिए ये किसी तोहफे से कम नहीं है। बजट बड़ा लग रहा है। अगले भाग का इंतज़ार नहीं हो रहा।
कॉस्ट्यूम और सेट डिज़ाइन पर बहुत मेहनत साफ़ झलकती है। वो वर्दी पहने लोग और वो पुराना एरेना, सब कुछ जच रहा है। डिटेलिंग में ही असली कलाकारी छिपी होती है। ज़ॉम्बीज़ के सम्राट ने प्रोडक्शन वैल्यू के मामले में नया मानक स्थापित किया है। देखने वाले को बांधे रखने की ताकत है इसमें। कलाकारों का अभिनय भी सराहनीय है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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