इस सीन में डिनर टेबल पर जो गहरी खामोशी छाई है, वो सब कुछ कह रही है। बाहर घना कोहरा है और अंदर रिश्तों में दरारें साफ दिख रही हैं। सफेद बालों वाले पिता की बातें सब पर भारी लग रही हैं। प्यार की चॉइस में ऐसे फैमिली ड्रामा देखकर लगता है कि अमीरी के बावजूद सुकून नहीं खरीदा जा सकता। चिमनी की आग भी इस ठंडक को कम नहीं कर पा रही है।
टेबल के हेड पर बैठे व्यक्ति की आवाज़ में जो अधिकार है, वो पूरे कमरे में छाया हुआ है। वो वाइन का ग्लास घुमाते हुए जो देख रहे हैं, लगता है सबकी खबर रखते हैं। प्यार की चॉइस की कहानी में ये किरदार बहुत अहम लग रहा है। बेटों के चेहरे के भाव बता रहे हैं कि वो कुछ छिपा रहे हैं। बहुत गहराई है इस किरदार में।
नारंगी कार्डिगन वाली माँ बीच में बचाने की कोशिश कर रही हैं। उनकी मुस्कान के पीछे की बेचैनी साफ दिख रही है। जब वो हाथ से इशारा करती हैं, तो लगता है वो बात को टालना चाहती हैं। प्यार की चॉइस में माँ का किरदार हमेशा मुश्किल में होता है। खाना खाते हुए भी उनका ध्यान सब पर है, ये मामूली बात नहीं है।
बाईं तरफ बैठे लड़के की चुप्पी सबसे शोर मचा रही है। वो बस सुन रहा है लेकिन उसकी आँखों में सवाल हैं। जब वो ऊपर देखता है तो लगता है वो भागना चाहता है। प्यार की चॉइस में इस किरदार की कहानी क्या होगी, ये जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। उसकी स्टाइल और खामोशी का कॉम्बिनेशन कमाल का है।
जो लड़का स्कार्फ पहने था, वो अचानक उठकर चला गया। ये बात साफ है कि उसे ये माहौल पसंद नहीं आया। उसने बिना कुछ कहे टेबल छोड़ दी, जो सबसे बड़ा विद्रोह था। प्यार की चॉइस में ये मोड़ बहुत जरूरी था। बाकी सब वहीं बैठे रहे, बस वो ही हिम्मत दिखा पाया। उसकी आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा था।
टेबल पर इतना सारा खाना है लेकिन किसी की भूख बातों में खो गई है। वाइन के ग्लास और प्लेट्स सजे हैं पर असली नशा बातों का है। प्यार की चॉइस के इस एपिसोड में डिनर सीन बहुत ही तनावपूर्ण है। हर निवाले के बीच में एक अनकही बात आ जाती है। सेटिंग बहुत अमीराना है पर दिलों में फासले हैं।
पीछे जलती हुई चिमनी पूरे कमरे को रोशनी दे रही है, पर रिश्तों में ठंडक है। जब पिता हँसते हैं तो भी एक अजीब सा डर बना रहता है। प्यार की चॉइस में ऐसे सीन दिखाते हैं कि आप बस देखते रह जाते हैं। लाइटिंग और एक्टिंग का कमाल है। बाहर का कोहरा और अंदर का माहौल एक जैसा लग रहा है।
जब हाथ में वाइन का ग्लास घूमता है, तो लगता है कोई बड़ा फैसला होने वाला है। उंगलियों की पकड़ बता रही है कि इंसान कितना सतर्क है। प्यार की चॉइस में छोटी चीजों से बड़ी बातें कही गई हैं। ये डिनर सिर्फ खाने के लिए नहीं, किसी और वजह से हुआ है। हर ग्लास में एक राज छिपा है।
सब एक साथ बैठे हैं पर कोई किसी के पास नहीं है। दूरियाँ साफ दिख रही हैं। माँ कोशिश कर रही हैं कि सब ठीक लगे। प्यार की चॉइस में फैमिली डायनामिक्स बहुत रियल लगते हैं। जब वो लड़का उठकर जाता है, तो सबकी सांसें रुक सी जाती हैं। ये बंधन अब बोझ बनते जा रहे हैं।
घर बहुत बड़ा है, खिड़कियाँ ऊँची हैं, पर बातें छोटी हैं। बाहर का नज़ारा सुकून देता है पर अंदर का शोर नहीं थम रहा। प्यार की चॉइस ने इस सीन से ही कहानी की पकड़ मजबूत कर ली है। कपड़ों की महंगता और भावनाओं की सस्ती गिरावट साफ दिख रही है। बहुत प्रभावशाली दृश्य है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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