कबाड़ का मेक सुल्तान में जब जायंट रोबोट ने उस विशालकाय एलियन के पंजे को तोड़ा, तो मेरी सांसें रुक गईं। ग्रीन एनर्जी का विस्फोट और फिर उस राक्षस का चीखना, सब कुछ इतना रियल लगा कि मैं सीट से उठ खड़ा हुआ। यह सीन सिर्फ एक्शन नहीं, इंसानियत की जीत है।
जब युवा पायलट ने अपने सूट में खड़े होकर उस बहु-आंखों वाले राक्षस को देखा, तो उसकी आंखों में जो डर था, वो मुझे भी महसूस हुआ। कबाड़ का मेक सुल्तान ने दिखाया कि हीरो भी डरते हैं, बस वो डर के आगे नहीं झुकते। यह इमोशनल लेयर फिल्म को खास बनाती है।
उस एलियन क्रिएचर का डिज़ाइन देखकर मैं हैरान रह गया। इतनी सारी आंखें, टेंटाकल्स और मांसल शरीर – यह किसी बुरे सपने जैसा लग रहा था। कबाड़ का मेक सुल्तान की वीएफएक्स टीम ने सच में कमाल कर दिया है। हर फ्रेम में डर और अद्भुतता का मिश्रण है।
जब राक्षस गिरा और लोग चिल्लाने लगे, कुछ रोने लगे, कुछ राहत की सांस लेने लगे – यह सीन मुझे बहुत इमोशनल कर गया। कबाड़ का मेक सुल्तान ने सिर्फ एक्शन नहीं, इंसानी जज्बातों को भी बखूबी दिखाया है। यह फिल्म दिल से जुड़ती है।
वो बूढ़े साइंटिस्ट का चेहरा जब उस राक्षस को स्क्रीन पर देखकर चमक उठा, तो मुझे लगा कि इंसान कभी-कभी खतरे को भी खोज मान लेता है। कबाड़ का मेक सुल्तान ने विज्ञान और पागलपन के बीच की पतली रेखा को बहुत खूबसूरती से दिखाया है।
जब वो मशीन हवा में तैरती हुई राक्षस के सामने आई, तो लगा जैसे कोई देवता युद्ध के लिए उतरा हो। उसका ब्लू ग्लो और स्लीक डिज़ाइन – सब कुछ परफेक्ट था। कबाड़ का मेक सुल्तान में ऐसे सीन्स हैं जो आपको बार-बार देखने पर मजबूर कर देंगे।
युद्ध के बाद जब घायल सैनिक जमीन पर बैठे थे, कुछ रो रहे थे, कुछ एक-दूसरे को संभाल रहे थे – यह सीन मुझे बहुत भारी लगा। कबाड़ का मेक सुल्तान ने युद्ध की कीमत को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। यह सिर्फ एक्शन नहीं, इंसानियत की कहानी है।
जब वो महिला अफसर रो रही थी और उसके चेहरे पर खून के निशान थे, तो मैं भी रो पड़ा। उसकी आंखों में दर्द और हार का अहसास था। कबाड़ का मेक सुल्तान ने महिला किरदारों को सिर्फ सपोर्टिंग नहीं, इमोशनल कोर बनाया है। यह बहुत जरूरी था।
क्या आपको भी लगा कि उस राक्षस की आंखों में सिर्फ गुस्सा नहीं, समझ भी थी? जब वो रोबोट को देख रहा था, तो लगा जैसे वो सोच रहा हो। कबाड़ का मेक सुल्तान ने एलियन को सिर्फ जानवर नहीं, एक बुद्धिमान प्राणी बनाया है। यह ट्विस्ट कमाल का है।
फिल्म के अंत में जब सब कुछ तबाह लग रहा था, फिर भी पायलट ने हार नहीं मानी – यह उम्मीद की किरण मुझे बहुत पसंद आई। कबाड़ का मेक सुल्तान ने दिखाया कि चाहे हालात कितने भी खराब हों, इंसान का हौसला नहीं टूटता। यह फिल्म दिल से जुड़ती है।
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