कबाड़ का मेक सुल्तान की शुरुआत ही इतनी भयानक है कि रूह कांप जाए। बादलों के बीच से झांकता वह एकलौता विशाल आंख वाला राक्षस सच में डरावना लग रहा है। जब वह अपनी पुतली सिकोड़ता है तो लगता है जैसे वह सीधे हमारी आत्मा को देख रहा हो। यह दृश्य सिनेमाई इतिहास में सबसे बेहतरीन में से एक है। नेटशॉर्ट पर यह देखना एक अलग ही अनुभव था।
जब मेक सुल्तान का पूरा रूप सामने आया तो हॉल में सन्नाटा छा गया। उसके शरीर से लटकते टेंटिकल्स और चेहरे पर मौजूद कई आंखें किसी दुस्वप्न से कम नहीं लग रही थीं। कबाड़ का मेक सुल्तान में इस राक्षस का डिज़ाइन इतना विस्तृत है कि आप उसे घंटों तक देखते रह सकते हैं। उसकी हरकतें इतनी प्राकृतिक हैं कि विश्वास ही नहीं होता कि यह सीजीआई है। सच में वीएफएक्स टीम को सलाम।
जब जायंट रोबोट मैदान में उतरा तो माहौल पूरी तरह बदल गया। उसका धातु का शरीर और हाथ में पकड़ी चमकदार तलवार देखकर रोंगटे खड़े हो गए। कबाड़ का मेक सुल्तान में यह मुकाबला देखने लायक है। रोबोट की चाल और उसकी ताकत का प्रदर्शन शानदार है। जब वह उस विशाल राक्षस के सामने खड़ा होता है, तो लगता है जैसे टाइटन आपस में भिड़ रहे हों। यह एक्शन सीन दिल धड़कने वाला है।
सिर्फ बाहर का युद्ध ही नहीं, अंदर का युद्ध भी उतना ही तीव्र है। जब पायलट को उस राक्षस के साथ मानसिक जुड़ाव महसूस होता है और वह दर्द से चिल्लाता है, तो दर्शक भी बेचैन हो जाता है। कबाड़ का मेक सुल्तान ने इस साइकोलॉजिकल एंगल को बहुत गहराई से दिखाया है। उस युवक की आंखों में डर और जिद्द दोनों साफ दिख रही थी। यह इमोशनल ड्रामा एक्शन से कम नहीं है।
फिल्म का क्लाइमेक्स जब ब्लड नेबुला में शिफ्ट होता है, तो नज़ारा बेमिसाल हो जाता है। चारों तरफ आग और टूटते हुए उल्कापिंडों के बीच लड़ाई देखकर आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। कबाड़ का मेक सुल्तान के इस हिस्से में कलर ग्रेडिंग और एटमॉस्फियर कमाल के हैं। लाल और नारंगी रंगों का प्रयोग खतरे का अहसास दिलाता है। यह युद्ध दृश्य बजट और क्रिएटिविटी का बेहतरीन नमूना है।
वह पात्र जिसका आधा चेहरा मशीनी है और आंख नीली चमकती है, उसकी उपस्थिति ही रहस्यमयी है। वह कमांडर है या कोई अन्य? कबाड़ का मेक सुल्तान में उसके किरदार की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं। जब वह दर्द में होता है फिर भी नेतृत्व करता है, तो उसकी ताकत का अंदाजा होता है। उसका साइबोर्ग लुक और एक्टिंग ने इस किरदार को यादगार बना दिया है।
सिर्फ बड़ा राक्षस ही नहीं, उसके शरीर से निकलते छोटे-छोटे भयानक जीव भी उतने ही खतरनाक हैं। जब वे झुंड में हमला करते हैं तो रोबोट के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। कबाड़ का मेक सुल्तान में इन छोटे दुश्मनों का डिज़ाइन भी बहुत क्रिएटिव है। उनकी तेज़ी और हमला करने का तरीका देखकर लगता है कि बच निकलना नामुमकिन है। यह हॉरर एलिमेंट फिल्म को और भी रोचक बनाता है।
जब रोबोट अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करता है और नीली ऊर्जा से चमकने लगता है, तो वह दृश्य जादुई लगता है। कबाड़ का मेक सुल्तान में इस पावर अप सीन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। वह तलवार जो नीली रोशनी से जगमगाती है, राक्षस के लिए मौत का पैगाम बन जाती है। यह विजुअल इफेक्ट्स का ऐसा उपयोग है जो आंखों को ठंडक पहुंचाता है।
बाहर युद्ध चल रहा है और अंदर कमांड सेंटर में तनाव चरम पर है। जब स्क्रीन पर डेटा तेज़ी से बदलता है और पायलट की हालत खराब होती है, तो दर्शक भी बेचैन हो जाता है। कबाड़ का मेक सुल्तान ने इस टेक्नोलॉजिकल सेटअप को बहुत रियलिस्टिक बनाया है। वहां मौजूद टीम की घबराहट और कोशिशें साफ झलकती हैं। यह सीन फिल्म की रफ़्तार को बनाए रखता है।
सारी तबाही और डर के बीच जब रोबोट अंततः राक्षस पर हावी होता है, तो एक राहत की सांस आती है। कबाड़ का मेक सुल्तान का अंत निराशाजनक नहीं बल्कि उम्मीद भरा है। वह दृश्य जहां राक्षस की विशाल आंख मद्धम पड़ती है, विजय का प्रतीक है। यह फिल्म हमें बताती है कि चाहे दुश्मन कितना भी बड़ा क्यों न हो, हिम्मत और तकनीक से उसे हराया जा सकता है।
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