जब वो मास्क वाला आदमी अपनी नीली चमकती आंखें दिखाता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लगता है जैसे वो इंसान नहीं, कोई मशीन या प्रयोग हो। उसकी ठंडी आवाज़ और धमकी ने माहौल को और भी डरावना बना दिया। (डब्ड) चार हीरोइन्स कॉन्कर करके उठो में ऐसे ट्विस्ट देखकर दिमाग घूम जाता है।
ये डायलॉग सुनकर हैरानी हुई कि तूफान कोई कुदरती आपदा नहीं, बल्कि एक टेस्ट था। जो बच गए, वही 'लाइव एसेट्स' हैं। ये सोच कि इंसानों को पेट्री डिश में रखा गया हो, बहुत डरावनी है। नेटशॉर्ट पर ऐसे साइको थ्रिलर देखना एक अलग ही अनुभव है।
कैमो टॉप वाली हीरोइन के हाथ में खून से सना चाकू देखकर ही समझ आ गया कि वो मामूली नहीं है। उसकी आंखों में गुस्सा और चेहरे पर ठंडक है। जब वो कहती है 'वरना ये और जल्दी खत्म होगा', तो लगता है वो सच में कुछ भी कर सकती है।
जब स्क्रीन पर 'चेतावनी' और 'स्वयं-विनाश' फ्लैश हुआ, तो सांसें अटक गईं। १० मिनट का काउंटडाउन और पूरे फैसिलिटी को उड़ाने की धमकी ने एड्रेनालाईन बढ़ा दिया। हीरो का घबराया चेहरा देखकर लग रहा था कि अब सब खत्म होने वाला है।
ब्लैक रॉक ग्रुप का नाम सुनते ही समझ आ गया कि ये कोई आम विलन नहीं है। उनका प्लान, बायो सैंपल्स और असली सोना निकालना, सब कुछ बहुत गहराई से प्लान किया गया लग रहा था। ये आउटपोस्ट सिर्फ मॉनिटरिंग के लिए था, ये बात रोंगटे खड़े कर देती है।
हीरो जब उस मास्क वाले को पकड़कर सच्चाई उगलवा रहा था, तो उसकी आंखों में गुस्सा और बेबसी दोनों साफ दिख रहे थे। 'मुझे सब कुछ बताओ, अभी!' वाली चीख में इतना दर्द था कि लग रहा था वो सब कुछ हार चुका है। एक्टिंग जबरदस्त थी।
जब पता चला कि वो सब टेस्ट सब्जेक्ट्स हैं और उन्हें चुनकर यहां लाया गया था, तो कहानी एक नया मोड़ ले गई। फिजिकल और साइकोलॉजिकल रेजिलिएंस टेस्ट करने के लिए तूफान भेजना, ये सोच बहुत ही विकृत और डरावनी है।
अंत में जब मास्क वाले की आंखें लाल हो गईं और उसने कहा 'सीक्वेंस लॉक हो गया है', तो लग गया कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं है। उसकी मुस्कान में पागलपन था। (डब्ड) चार हीरोइन्स कॉन्कर करके उठो का ये क्लाइमेक्स दिल दहला देने वाला था।
जब हीरो और हीरोइन ने सामान उठाया और भागने लगे, तो स्क्रीन के सामने बैठे-बैठे ही पसीने आ गए। पीछे से आती धमकियां और सामने से बंद दरवाजे, ये सीन बहुत ही क्लस्ट्रोफोबिक था। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना एक अलग ही रोमांच है।
ये डायलॉग कि 'तुम एक पेट्री डिश के अंदर थे', सुनकर इंसान का अस्तित्व ही खतरे में लगने लगा। पूरा आइलैंड एक प्रयोगशाला है और हम सब चूहे हैं, ये थीम बहुत ही गहरी और डरावनी है। ऐसे कॉन्सेप्ट वाले शोज कम ही मिलते हैं।
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