कुकिंग का राजा में सुनहरे मुखौटे पहने रसोइये का प्रवेश देखकर ही रोंगटे खड़े हो गए। जब उसने तवे में आग लगाई तो पूरा सभा कक्ष तालियों से गूंज उठा। उसकी सजावट इतनी शानदार थी कि निर्णायक भी हैरान रह गई। नीली वर्दी वाले रसोइये के पैसे गिनने वाले दृश्य ने हास्य का तड़का लगा दिया। यह मुकाबला सिर्फ खाने का नहीं, शैली का भी है।
नीले रंग के कपड़े पहने रसोइये ने पैसे गिनकर सबको चौंका दिया। लगता है उसने निर्णायक को रिश्वत देने की योजना बनाई थी। लेकिन जब निर्णायक ने उसका सादा चावल चखा तो उसका चेहरा उतर गया। कुकिंग का राजा में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। आखिर कौन जीतेगा यह जंग? देखने वालों की सांसें थम गई हैं।
जब निर्णायक मैडम ने लॉबस्टर वाला व्यंजन चखा तो उनकी आंखों में चमक आ गई। वे बार-बार तारीफ कर रही थीं। लेकिन दूसरी तरफ सादे चावल देखकर उनका मनोदशा खराब हो गया। कुकिंग का राजा में भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निर्णायक का हर भाव कैमरे में कैद हो रहा है और दर्शक दीवाने हो रहे हैं।
एक रसोइया आग से खेल रहा है तो दूसरा नोटों से। कुकिंग का राजा ने दिखा दिया कि कुकिंग कार्यक्रम अब सिर्फ स्वाद का नहीं, नाटक का भी स्थल बन गया है। सुनहरे मुखौटे वाले रसोइये का आत्मविश्वास स्तर देखकर लगता है वह पहले से ही विजेता घोषित हो चुका है। नीला रसोइया थोड़ा घबराया हुआ लग रहा है।
एक प्लेट में राजसी लॉबस्टर और दूसरी में सादा पीला चावल। अंतर इतना साफ कि निर्णायक को चुनने में ज्यादा दिमाग नहीं लगाना पड़ा। कुकिंग का राजा में उच्च और सामान्य वर्ग का टकराव देखने को मिला। नीले रसोइये की मेहनत रंग लाई नहीं और वह हार के कगार पर खड़ा है। दर्शक भी हैरान हैं कि आखिर हुआ क्या।
पीछे बैठे दर्शकों की प्रतिक्रिया ने कार्यक्रम की जान डाल दी है। जब लॉबस्टर परोसा गया तो सबकी तालियां बज उठीं। लेकिन जब चावल आया तो सन्नाटा छा गया। कुकिंग का राजा में दर्शक भी एक पात्र बन गई है। सबके चेहरे पर अलग-अलग भाव देखने को मिल रहे हैं। यह कार्यक्रम सिर्फ कुकिंग नहीं, मनोरंजन का खजाना है।
सुनहरे मुखौटे ने रसोइये की पहचान छिपा रखी है, जिससे कार्यक्रम में तनाव बना हुआ है। वह इतना आत्मविश्वासी है जैसे उसे पहले से पता हो कि वह जीत जाएगा। कुकिंग का राजा में यह रहस्य तत्व कार्यक्रम को और भी रोचक बना रहा है। क्या वह कोई प्रसिद्ध रसोइया है? यह सवाल सबके दिमाग में चल रहा है।
नीली वर्दी वाले रसोइये का चेहरा देखकर लग रहा है कि उसे अपनी हार का अहसास हो गया है। उसने पैसे गिनकर शायद जीत खरीदने की कोशिश की, लेकिन निर्णायक नहीं मानी। कुकिंग का राजा में यह दृश्य दिल को छू गया। कभी-कभी मेहनत भी किस्मत के आगे हार जाती है। दर्शक उसके लिए सहानुभूति महसूस कर रहे हैं।
निर्णायक मैडम ने बिना ज्यादा सोचे लॉबस्टर वाले रसोइये को विजेता घोषित कर दिया। उनकी शारीरिक भाषा से साफ जाहिर था कि उन्हें कौन सा व्यंजन पसंद आया। कुकिंग का राजा का यह प्रकरण यादगार बन गया है। निर्णायक का फैसला सुनते ही पूरा सभा कक्ष तालियों से गूंज उठा। विजेता रसोइये की खुशी देखने लायक थी।
कुकिंग का राजा का यह प्रकरण एक भव्य समापन जैसा लगा। आग, पैसे, लॉबस्टर, चावल और निर्णायक का नाटकीय प्रतिक्रिया। सब कुछ पूर्ण तरीके से तैयार किया गया था। सुनहरे मुखौटे वाले रसोइये ने बाजी मार ली। नीला रसोइया हारकर भी मुस्कुरा रहा था। यह कार्यक्रम सिर्फ खाना बनाने का नहीं, भावनाओं का भी त्योहार है।
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