महेश मेहता का सफर देखकर लगता है कि हर दर्द एक नई शुरुआत लाता है। दादाजी के जाने के बाद वह हवा में उड़ते हुए गोल मारता है, जैसे उनका आशीर्वाद उसके साथ हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने दिखाया कि प्यार और जुनून कैसे एक खिलाड़ी को चैंपियन बनाते हैं। उसका जश्न और प्रेमिका के साथ पल बहुत प्यारे थे।
कोच कार्लो एन्सेलॉटी का महेश पर भरोसा देखकर अच्छा लगा। जब महेश रो रहा था, तो कोच ने उसे संभाला और कहा कि अब तुम्हें खेलना है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम में यह रिश्ता बहुत गहरा है। महेश ने न सिर्फ गोल किए, बल्कि अपने दादाजी के सपने को भी पूरा किया। यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है।
महेश मेहता का मैदान में दौड़ना, गेंद को आग की तरह उड़ाना और गोल करना — सब कुछ इतना ड्रामेटिक था कि सांस रुक गई। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने दिखाया कि दर्द कैसे ताकत बन सकता है। जब उसने ऊपर इशारा किया, तो लगा जैसे दादाजी को धन्यवाद दे रहा हो। यह पल कभी नहीं भूलूंगा।
महेश के जीतने के बाद उसकी प्रेमिका का गले लगना और गोल्डन बॉल के साथ फोटो — यह पल बहुत रोमांटिक था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने दिखाया कि सफलता तब और भी मीठी होती है जब कोई आपके साथ हो। महेश का मुस्कुराना और उसका देश का झंडा ओढ़ना — सब कुछ परफेक्ट था।
जब दादाजी ने महेश की तस्वीर पकड़ रखी थी और फिर उनकी सांसें रुक गईं — यह पल इतना इमोशनल था कि मैं रो पड़ा। पंचदीपा की फुटबॉल टीम में यह दृश्य सबसे ज्यादा दिल को छू गया। महेश का अस्पताल में घुटनों के बल रोना और फिर हवाई जहाज में सोचना — सब कुछ बहुत गहरा था।