जब स्कोरबोर्ड पर दो शून्य का अंक चमका, तो कमेंटेटर बॉक्स में बैठे एंकर्स के चेहरे पर जो मायूसी थी, वह शब्दों से बयां नहीं की जा सकती। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के युवा खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी, लेकिन विपक्षी टीम की रणनीति इतनी मजबूत थी कि कोई रास्ता नहीं बचा। यह दृश्य हर उस व्यक्ति को याद दिलाता है जो अपनी मेहनत के बावजूद हार जाता है।
स्टेडियम में बैठे प्रशंसकों की आंखों में आंसू और चेहरे पर निराशा देखकर लगता है जैसे उनका अपना सपना टूट गया हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए चीयर करने वाले हर व्यक्ति का दर्द कैमरे ने बखूबी कैद किया है। यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का सवाल था, जो इस पल धराशायी हो गया।
नीली जर्सी पहने विपक्षी स्ट्राइकर की स्पीड और ड्रिबलिंग देखकर लगता है जैसे वह मैदान पर अकेला ही दौड़ रहा हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के डिफेंडर्स उसके सामने बेबस नजर आए। उसका हर कदम, हर पास और हर शॉट इतना सटीक था कि गोलकीपर के पास बचने का कोई मौका ही नहीं बचा। यह प्रदर्शन वाकई लाजवाब था।
साइडलाइन पर खड़े कोच के चेहरे पर जो गंभीरता और चिंता थी, वह बता रही थी कि खेल उनके हाथ से निकल रहा है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम को नई रणनीति की सख्त जरूरत थी, लेकिन विपक्षी टीम का दबाव इतना ज्यादा था कि कोई बदलाव संभव नहीं हुआ। कोच की बेबसी हर उस नेता को सिखाती है जो संकट में घिर जाता है।
रेफरी की सीटी और उसके सख्त रवैये ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों को लग रहा था कि उन्हें थोड़ा मौका मिलना चाहिए, लेकिन नियम कठोर थे। रेफरी का हर निर्णय वीडियो असिस्टेंट की तरह सटीक लग रहा था, जिसने खेल को एक नया आयाम दे दिया और परिणाम तय कर दिया।