रेफरी ने जिस तरह पीला कार्ड दिखाया, लगता था जैसे मैच का रुख बदल गया। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों के चेहरे पर निराशा साफ दिख रही थी। ऐसे मोड़ पर कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है। क्या अब टीम हार मान लेगी?
उस सफेद बालों वाले खिलाड़ी ने जिस तरह गेंद को घुमाया, वो जादू लग रहा था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए वो उम्मीद की किरण था। उसकी आँखों में जीत की चमक थी, और हर कदम पर जोश। ऐसे खिलाड़ी मैच पलट सकते हैं।
स्टेडियम में बैठे दर्शकों की आवाज़ें इतनी तेज थीं कि लगता था जैसे मैदान हिल रहा हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के हर मूव पर उनकी प्रतिक्रिया देखकर मजा आ गया। कोई चिल्ला रहा था, कोई रो रहा था — ये सिर्फ खेल नहीं, इमोशनल राइड थी।
लाल जर्सी वाले कप्तान के चेहरे पर गुस्सा और आँखों में आंसू — दोनों एक साथ थे। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए वो सिर्फ लीडर नहीं, दिल था। उसकी चीखें सुनकर लगता था जैसे वो अकेला पूरे मैच को संभाल रहा हो।
कमेंटेटर बॉक्स में बैठे उस आदमी की आवाज़ में इतना जोश था कि लगता था वो खुद मैदान में दौड़ रहा हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के हर पल को उसने इतने ड्रामे के साथ बताया कि दर्शक भी सांस रोके बैठे थे।