जब कमेंटेटर माइक छोड़कर सिर पकड़ लेता है, तो समझ आता है कि मैच कितना टेंशन वाला है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के हर पल में ड्रामा है। भीड़ की चीखें, खिलाड़ियों का पसीना, गोलकीपर की आंखों में डर - सब कुछ इतना जीवंत है कि लगता है हम भी स्टेडियम में बैठे हैं।
नंबर ७ का हवा में छलांग लगाकर गोल करना और फिर जश्न मनाना - ये सीन देखकर दिल की धड़कन रुक गई। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने एक्शन और इमोशन का परफेक्ट बैलेंस बनाया है। गोलकीपर का निराश चेहरा और फिर कमेंटेटर का सिर पकड़ना - सब कुछ इतना रियल लगता है।
वो मुस्कान जो सफेद बालों वाले खिलाड़ी के चेहरे पर थी, वो किसी विलेन जैसी लग रही थी। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के कैरेक्टर डिजाइन इतने यूनिक हैं कि हर कोई याद रह जाता है। टनल में खड़े होकर वो जो नजरें मिलाता है, वो सीन बार-बार देखने को मन करता है।
स्टेडियम में बैठे दर्शकों के चेहरे पर जो एक्सप्रेशन हैं, वो बिल्कुल असली लगते हैं। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने भीड़ के रिएक्शन पर भी उतना ही ध्यान दिया है जितना खिलाड़ियों पर। जब गोल होता है तो सबकी आंखें फैल जाती हैं - ये डिटेलिंग कमाल की है।
गोलकीपर के चेहरे पर पसीना और आंखों में डर देखकर लगता है कि वो असल में मैच हार रहा है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के हर कैरेक्टर की इमोशनल जर्नी इतनी गहरी है कि हम भी उनके साथ महसूस करने लगते हैं। उसका चीखना और फिर निराश होना - सब कुछ परफेक्ट है।