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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताजवां7एपिसोड

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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताज

माता-पिता की खोज में विक्रम पहाड़ से उतरा। जेड ताबीज़ लेकर वह योद्धाओं की दुनिया में आया। शक्तिनगर में अंजलि चौहान को राठौरों से बचाया, दोनों परिवारों के झगड़े में फंस गया। चौहान परिवार में पता चला कि सीमा उसकी माँ है, ताबीज़ से उसका नाता। पिता राजेश ने उसे 'निकम्मा' कहा। माँ सीमा और बहन प्रिया पर खतरा आया तो उसने ताकत छिपाना छोड़ा, परिवार की रक्षा को लड़ने का संकल्प लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

माथादेवी की नजर में छिपा था राज

माथादेवी ने जब कहा कि अमित तीन बार करे और तलवार मुड़े, तो लगा जैसे वह पहले से जानती थी क्या होने वाला है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर शब्द के पीछे एक योजना है।

राहुल की चुप्पी सबसे ज्यादा बोलती है

राहुल कुछ नहीं बोला, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ कह रही थीं। जब वह बोला कि 'हम होते तो इसे हमारा पहरेदार भी नहीं बनाते', तो लगा जैसे वह अपने आप से लड़ रहा हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे किरदार ही कहानी को जिंदा रखते हैं।

लाल कालीन पर खून के निशान

लाल कालीन पर गिरे खून के निशान सिर्फ रंग नहीं, बल्कि दर्द की कहानी कह रहे थे। जब अमित गिरा और उसने अपना हाथ पकड़ा, तो लगा जैसे वह अपनी ही कमजोरी से लड़ रहा हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

चौहान जी का चेहरा सब कुछ कहता है

चौहान जी का चेहरा जब बदला, तो लगा जैसे पूरा परिवार टूट गया हो। उनकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि निराशा थी। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर किरदार के पीछे एक दर्दनाक इतिहास छिपा है।

अमित की तलवार में था जादू

अमित की तलवार जब मुड़ी, तो लगा जैसे हवा भी रुक गई हो। उसकी हर चाल में एक अजीब सी लय थी, जैसे वह पहले से जानता था कि क्या करना है। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे एक्शन सीन देखकर लगता है कि हर झटका एक कहानी कहता है।

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