घायल माँ के चेहरे पर डर नहीं, बेटे के लिए चिंता थी। राहुल ने कहा—'माँ, डरो मत, मैं तुम्हें घर ले जाने आया।' यह डायलॉग सुनकर आँखें नम हो गईं। दुश्मन मज़ाक उड़ा रहा था, पर राहुल की आवाज़ में वादा था। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल ही तो जान डालते हैं। खून बह रहा था, पर प्यार उससे भी गहरा था।
काले लिबास वाला युवक तलवार घुमा रहा था, जैसे जीत पहले से तय हो। पर राहुल की चुप्पी उससे भी खतरनाक थी। जब उसने कहा—'तुम जैसा बेकार इंसान मुझे हरा नहीं सकता', तो लगा जैसे आग बुझने वाली हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में हर डायलॉग वार की तरह लगता है। अब देखना है कौन गिरता है।
लाल कालीन पर खून के छींटे, घायल माँ, और बीच में खड़ा राहुल—यह दृश्य किसी पेंटिंग जैसा था। दुश्मन हँस रहा था, पर राहुल की आँखों में आँधी थी। जब वह आगे बढ़ा, तो लगा जैसे समय थम गया हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में हर फ्रेम कहानी कहता है। यह सिर्फ़ लड़ाई नहीं, भावनाओं का युद्ध है।
राहुल की आँखों में डर नहीं, बस एक अजीब सी शांति थी। जैसे वह जानता हो कि अंत क्या होगा। दुश्मन की तलवार चमक रही थी, पर राहुल के हाथ खाली थे—फिर भी वह हारा हुआ नहीं लग रहा था। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यही तो जादू है। बिना हथियार के भी जीतना संभव है, बस इरादे मज़बूत होने चाहिए।
बूढ़े गुरु चुपचाप बैठे थे, पर उनकी आँखें सब देख रही थीं। जब राहुल आया, तो उनके चेहरे पर हैरानी नहीं, बस एक अजीब सी मुस्कान थी। जैसे वह जानते हों कि यह पल आएगा ही। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में हर किरदार की अपनी कहानी है। गुरु की चुप्पी भी एक डायलॉग थी।