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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताजवां44एपिसोड

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(डबिंग) तलवार के दम पर सरताज

माता-पिता की खोज में विक्रम पहाड़ से उतरा। जेड ताबीज़ लेकर वह योद्धाओं की दुनिया में आया। शक्तिनगर में अंजलि चौहान को राठौरों से बचाया, दोनों परिवारों के झगड़े में फंस गया। चौहान परिवार में पता चला कि सीमा उसकी माँ है, ताबीज़ से उसका नाता। पिता राजेश ने उसे 'निकम्मा' कहा। माँ सीमा और बहन प्रिया पर खतरा आया तो उसने ताकत छिपाना छोड़ा, परिवार की रक्षा को लड़ने का संकल्प लिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

हार के बाद गुरु का टूटना दिल दहला गया

गुरु का हार के बाद घुटनों पर गिरना और माफी मांगना देखकर दिल बहुत दुखी हुआ। वे जो कभी इतने घमंडी थे, अब बिल्कुल टूट चुके थे। उनका 'मैं गलत था' कहना और रोना, एक महान योद्धा के पतन की कहानी कह रहा था। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह अंत बहुत भावनात्मक था। यह दिखाता है कि हार सिर्फ तलवार से नहीं, बल्कि अहंकार से भी होती है। गुरु का यह अंत यादगार था।

युवा योद्धा की चुप्पी सबसे बड़ी तलवार थी

मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया उस युवा योद्धा के शांत स्वभाव ने। जब गुरु जोर-जोर से बोल रहे थे, वह बस मुस्कुरा रहा था। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह सब कुछ जानता हो। जब उसने कहा 'क्या तुम सच में महान योद्धा हो?', तो लगा जैसे उसने गुरु की आत्मा को झकझोर दिया हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में ऐसे किरदार ही कहानी की जान होते हैं। उसका आत्मविश्वास नकली नहीं, बिल्कुल असली लग रहा था।

गुरु की तलवारबाजी में था कुछ जादू

माना कि अंत में गुरु हार गए, लेकिन शुरुआत में उनकी तलवारबाजी देखकर मैं दंग रह गया। हवा में तलवार घुमाने का उनका अंदाज किसी नृत्य जैसा लग रहा था। जब वे बोल रहे थे कि 'जब दिल धड़कता है तो शक्ति भी चलती है', तो लगा जैसे वे किसी मंत्र का जाप कर रहे हों। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज के इस दृश्य में एक्शन और डायलॉग का संतुलन बहुत अच्छा था। भले ही वे हार गए, पर उनकी कला का लोहा मानना पड़ता है।

लाल कालीन पर हुआ असली इम्तिहान

यह लाल कालीन सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों के बीच के संघर्ष का प्रतीक लग रहा था। एक तरफ अनुभवी गुरु, दूसरी तरफ नई पीढ़ी का प्रतिनिधि। जब युवा योद्धा ने अपनी तलवार निकाली, तो लगा जैसे इतिहास बदल रहा हो। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में इस सेट डिजाइन ने कहानी को और भी गहराई दी है। पृष्ठभूमि में पहाड़ और हरा-भरा वातावरण इस तनावपूर्ण माहौल के लिए एकदम सही था।

गुरु का अहंकार ही उनकी हार बना

गुरु शायद तकनीकी रूप से कमजोर नहीं थे, लेकिन उनका अहंकार ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। वे इतने आत्मविश्वास से भरे हुए थे कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को हल्के में ले लिया। जब युवा योद्धा ने चुनौती दी, तो वे घबरा गए। (डबिंग) तलवार के दम पर सरताज में यह संदेश बहुत स्पष्ट है कि घमंड इंसान को अंधा कर देता है। गुरु का अंत में रोना और माफी मांगना उनकी हार से ज्यादा दर्दनाक था।

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