जब उसने अपनी कमर से कसाई का चाकू निकाला, तो सब हैरान रह गए। बाकी योद्धाओं के पास भव्य तलवारें हैं, जबकि यह साधारण चाकू लेकर आया है। यह विरोधाभास बहुत दिलचस्प है। डबिंग तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पात्र हैं जो कमजोर दिखकर भी सबसे ताकतवर साबित होते हैं। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है।
सागर गुरु का जिक्र आते ही माहौल बदल गया। लगता है कि वह तलवारबाजी में बहुत ऊंचे मुकाम पर हैं। मुख्य पात्र का कहना कि उसे सागर गुरु ने भेजा है, सबको चौंका रहा है। डबिंग तलवार के दम पर सरताज में गुरु-शिष्य के रिश्ते को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। क्या वाकई यह अनजान व्यक्ति उस महान योद्धा से जुड़ा है?
प्रवेश द्वार पर यह झगड़ा बहुत रोमांचक है। गार्ड नियमों का पालन कर रहा है, जबकि मुख्य पात्र अपनी शर्तें मनवाने की कोशिश कर रहा है। पत्थर में हथियार चुभाने की चुनौती बहुत अनोखी है। डबिंग तलवार के दम पर सरताज में ऐसे दृश्य आते हैं जो दर्शकों की सांसों को रोक देते हैं। सबकी नजरें उस पत्थर पर टिकी हैं।
महिला पात्र चुपचाप सब देख रही है, लेकिन उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही है। वह मुख्य पात्र के साथ है, शायद वह उसकी ताकत को जानती है। डबिंग तलवार के दम पर सरताज में महिला पात्रों की भूमिका भी बहुत अहम है। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसका साथ देना ही काफी है। वह जानती है कि आगे क्या होने वाला है।
बाकी योद्धाओं का हंसना और मजाक उड़ाना स्वाभाविक है। उनके लिए एक कसाई का चाकू लेकर आना हास्यास्पद है। लेकिन यह हंसी जल्द ही डर में बदल सकती है। डबिंग तलवार के दम पर सरताज में ऐसे पल आते हैं जब उपहास करने वाले ही डर जाते हैं। मुख्य पात्र के चेहरे पर मुस्कान है, जो सब कुछ बदल सकती है।