इस शॉर्ट फिल्म में भावनाओं का जो तूफान दिखाया गया है, वो कमाल का है। मुख्य किरदार का रोना और फिर शावर में खड़ा होकर बात करना, ये सब बताता है कि वो अंदर से कितना टूट चुका है। गुलाब का बदला में ऐसे सीन्स हैं जो सीधे दिल पर वार करते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ये देखना एक अलग ही अनुभव था, बिल्कुल असली लगता है।
वो सीन जहाँ बूढ़े पिता बिस्तर पर लेटे हैं और अपनी बेटी का हाथ थामे हैं, वो सबसे ज्यादा इमोशनल था। उनकी आँखों में जो चिंता थी, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। गुलाब का बदला की कहानी में परिवार के बंधन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। ये सीन देखकर मेरी आँखें भी नम हो गईं, सच में दिल को छू लेने वाला था।
बाथरूम में हुए उस झगड़े ने सब कुछ बदल दिया। वो लड़की जो सफेद नाइटगाउन में थी, उसकी आवाज़ में जो गुस्सा और डर था, वो साफ़ झलक रहा था। शायद यही वो वजह थी जिसने अस्पताल वाले सीन की नींव रखी। गुलाब का बदला में हर डायलॉग और हर एक्सप्रेशन मायने रखता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना आजकल मुश्किल है।
शुरुआत में जब वो शख्स अपने दोस्त से बात कर रहा था, तो थोड़ा हंसी-मजाक वाला माहौल था। लेकिन फिर अचानक मूड बदल गया और हम अस्पताल के गंभीर माहौल में पहुँच गए। गुलाब का बदला की ये कहानी बताती है कि ज़िंदगी कितनी अनिश्चित है। एक पल में सब कुछ बदल सकता है, ये सीख इस वीडियो से मिलती है।
डॉक्टर के हाथ में क्लिपबोर्ड था और चेहरे पर गंभीरता। जब उसने मुख्य किरदार से बात की, तो हवा में तनाव साफ़ महसूस हो रहा था। गुलाब का बदला में मेडिकल सीन्स को बहुत रियलिस्टिक तरीके से दिखाया गया है। वो पल जब वो शख्स बेड के पास खड़ा होकर लड़की से बात कर रहा था, वो दिल को चीर देने वाला था।