जब वो औरत रोती है तो लगता है जैसे पत्थर भी पिघल जाए। उसकी पीड़ा असली लगती है। शायद गुलाब का बदला सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि टूटे हुए दिलों की दास्तान है जो हर किसी को छू लेती है।
काली ड्रेस वाली औरत की चालाकी और मर्द की बेबसी देखकर साफ पता चलता है कि यहाँ कुछ गड़बड़ है। गुलाब का बदला में हर किरदार के इरादे साफ नहीं हैं, और यही तो इस कहानी को इतना दिलचस्प बनाता है।
मर्द का पछतावा और औरत का गुस्सा देखकर लगता है कि रिश्ते बचाना अब नामुमकिन सा लग रहा है। गुलाब का बदला में ऐसे पल आते हैं जो इंसान को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या सही और क्या गलत।
अस्पताल के सीन में उस औरत के माथे पर चोट का निशान देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके साथ क्या बीती होगी। गुलाब का बदला की कहानी में हर जख्म एक नया सच बयां करता है।
लिविंग रूम में हुई बहस इतनी तेज थी कि दीवारें भी कांप उठीं। उस औरत का गुस्सा और मर्द की घबराहट देखकर लगता है कि गुलाब का बदला में आने वाला हर पल नया संघर्ष लेकर आता है।