गंजे विलेन ने जब गोली खाई और उसकी आंखें अचानक लाल हो गईं, तो लगा अब खून खराबा होगा। यह अलौकिक शक्ति फिल्म को नया मोड़ देती है। योद्धा का बदला में एक्शन के साथ थोड़ा जादू भी मिला है जो पसंद आया। उसकी चीख सुनकर आसपास खड़े लोग सहम गए। विशेष प्रभाव बहुत ही असली लग रहे थे और डरावने भी।
लाल रंग का गोल मंच और चारों तरफ खड़े दर्शक, यह दृश्य किसी बड़े मुकाबले की गवाही दे रहा है। धूप तेज थी और तनाव उससे भी ज्यादा गहरा था। योद्धा का बदला की मंच सजावट बहुत प्रामाणिक लगती है और देखने में सुंदर है। लकड़ी की नक्काशी और पुराने झंडे इतिहास को जीवित करते हैं। हर कोने से कहानी झांक रही है और मजा देती है।
पीछे खड़े काले कपड़े वाले लोग बस तमाशबीन नहीं लग रहे थे। उनकी आंखों में भी लड़ाई की चमक और उत्सुकता थी। योद्धा का बदला में भीड़ का प्रतिक्रिया भी कहानी का हिस्सा बन गया है। जब गंजा योद्धा चिल्लाया तो उन्होंने भी हथियार संभाल लिए। यह सामूहिक तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है और प्रभावशाली है।
गंजे योद्धा के मुंह से खून टपक रहा था फिर भी वह हंस रहा था। यह पागलपन खतरनाक है और डरावना भी। योद्धा का बदला में विलेन का यह रूप बहुत यादगार है और दिल पर असर करता है। दर्द को ताकत में बदलना उसकी आदत लगती है। उसकी हंसी में छिपा दर्द साफ झलक रहा था। यह अभिनय बहुत दमदार था।
सफेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग ने जब उंगली उठाई, तो लगा कोई बड़ी घोषणा होने वाली है। उनकी आवाज़ में दम था और आंखों में सालों का अनुभव। योद्धा का बदला के इस सीन में सम्मान और ताकत का टकराव साफ दिखता है। काले कपड़े वाले गुंडे भी उनकी बात सुनकर चुप खड़े थे। यह पात्र कहानी की रीढ़ लगता है और मार्गदर्शन करता है।
जब लाल पोशाक वाली सीढ़ियों से उतरकर तेजी से आई, तो सबकी सांसें रुक गईं। उसने नायक को कुछ दिया जो खेल बदल सकता है। योद्धा का बदला में ऐसे पल ही जान डालते हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आंखों में चिंता और साहस दोनों झलक रहे थे। पृष्ठभूमि में लटके दीये और पुरानी इमारतें दृश्य को और भी गहरा बना रही हैं। यह एंट्री शानदार थी।
लाल पोशाक वाली ने हाथ में पकड़ी हुई चीज नायक को सौंपी, वह क्या थी? कोई ताबीज या हथियार? योद्धा का बदला में इस रहस्य ने उत्सुकता बढ़ा दी है। दोनों के हाथ मिलते ही कुछ बड़ा होने वाला है। कैमरा ने इस सौंपने के पल पर खास ध्यान दिया है। यह छोटा पल बड़े बदलाव की शुरुआत है और कहानी को मोड़ता है।
पूरा वातावरण बदले की आग में जल रहा है और गर्म हो गया है। हर कोई किसी नतीजे का इंतजार कर रहा है। योद्धा का बदला का यह चरमोत्कर्ष बहुत भारी पड़ने वाला है और धमाकेदार है। पुराने जमाने की मारधाड़ और आज के विशेष प्रभावों का संगम है। दर्शक के रूप में मैं बस देखता रह गया। अगला भाग कब आएगा।
इस दृश्य में गंजे योद्धा की आंखें लाल होते ही माहौल पूरी तरह बदल गया। नीले कपड़े वाले नायक ने अपनी शांति बिल्कुल नहीं खोई। योद्धा का बदला की कहानी में यह मोड़ बहुत रोमांचक और अप्रत्याशित है। तलवार की धार और गुस्से का मिलन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। पुराने जमाने के अखाड़े की बनावट भी कमाल की है। हर किसी के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। यह दृश्य दिल दहला देने वाला है।
नीले कपड़े वाले युवक के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। सामने इतना खतरा हो फिर भी वह स्थिर खड़ा रहा। योद्धा का बदला में नायक का यह धैर्य सबसे बड़ा हथियार है जो उसे जीत दिला सकता है। उसने लाल पोशाक वाली से वस्तु ली और बिना कुछ कहे सामने देखा। यह चुप्पी शोर से ज्यादा डरावनी थी। असली योद्धा वही है जो घबराए नहीं।


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