मनीष शर्मा की आंखों में लालच साफ दिख रहा था जब वो हरी अंगूठी देख रहे थे। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में परिवार के अंदरूनी झगड़े बहुत गहराई से दिखाए गए हैं। मृत्यु के बाद भी सुकून नहीं मिला किसी को। माहौल बहुत भारी है और हर किरदार के चेहरे पर एक अलग ही कहानी लिखी हुई है। देखने में बहुत रोचक लग रहा है। आगे क्या होगा जानना जरूरी है।
अंतिम संस्कार का दृश्य बहुत ही भावुक कर देने वाला था। सफेद फूल और कागज के टुकड़े हवा में उड़ रहे थे। लक्ष्मी शर्मा का रोना दिल को छू गया। ऐसा लग रहा है कि वो कुछ छिपा रही हैं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी में अब तक के सबसे बेहतरीन दृश्यों में से एक है यह। मुझे यह पसंद आया। बहुत ही दुखद माहौल था वहां पर।
वो नौजवान साधु कौन है? उसकी एंट्री बहुत रहस्यमयी थी। कुणाल शर्मा हैरान रह गया उसे देखकर। लगता है शर्मा परिवार के राज अब खुलने वाले हैं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में हर मोड़ पर नया ट्विस्ट मिल रहा है। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है। बहुत उत्सुकता बढ़ गई है। कौन होगा वो? सब जानना चाहते हैं।
हरी अंगूठी की क्या खासियत है? बुजुर्ग शर्मा ने मरने से पहले वो क्यों दिखाई? मनीष शर्मा का चेहरा देखकर लगता है वो जानते हैं इसका राज। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में छोटी चीजें भी बड़े मतलब की हैं। निर्देशन बहुत शानदार है। कलाकारों ने जान डाल दी है। हर पल दिलचस्प है। क्या संकेत था ये?
जान्हवी शर्मा की मासूमियत इस कहानी में एक अलग रंग भर रही है। वो सफेद कपड़ों में बहुत सुंदर लग रही थीं। लेकिन क्या वो भी इस साजिश का हिस्सा हैं? सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। हर चेहरे के पीछे एक मुखौटा है। सस्पेंस बना हुआ है। कौन सच्चा है? कोई पता नहीं चल रहा।
बूढ़ा गृह व्यवस्थापक चुपचाप सब देख रहा था। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन चेहरे पर गंभीरता। शर्मा परिवार के गुप्त राज उसे पता हैं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में यह किरदार बहुत अहम साबित होने वाला है। पुराने जमाने की वफादारी दिखाई गई है। बहुत अच्छा लगा। उसकी चुप्पी बोल रही थी सब कुछ।
कुणाल शर्मा का सूट पहना लुक आधुनिक लग रहा था बाकी सबके पारंपरिक कपड़ों के बीच। यह टकराव जानबूझकर दिखाया गया है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में पीढ़ियों के बीच की खाई को दिखाया गया है। कहानी में दम है और अभिनय भी लाजवाब है। देखने लायक है। बहुत गहराई है इसमें। समय के साथ बदलाव।
मृत्यु के बाद भी परिवार में शांति नहीं है। मनीष शर्मा की चालाकी और लक्ष्मी शर्मा की चिंता साफ झलक रही है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में भावनाओं के साथ सत्ता की लड़ाई भी दिखाई गई है। दर्शक के रूप में मैं पूरी तरह से जुड़ गया हूं इस कहानी से। बहुत प्रभावित हूं। क्या होगा आगे? सब हैरान हैं।
उस तांत्रिक के हाथ में लकड़ी का टुकड़ा क्या था? उसने कुछ मंत्र पढ़े जैसे। माहौल और भी डरावना हो गया। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में रहस्य और डर का अच्छा मिश्रण है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आ रही है। बिल्कुल नया अनुभव मिल रहा है। रोमांचक है। डर लग रहा है। रात में देखना चाहिए।
शर्मा परिवार की हवेली बहुत पुरानी और विशाल है। अंधेरा और मोमबत्ती की रोशनी ने डरावना माहौल बनाया। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण के दृश्य बहुत मजबूत हैं। हर फ्रेम एक पेंटिंग जैसा लग रहा है। कला निर्देशन की दाद देनी होगी। दर्शक को बांधे रखने की क्षमता है। बहुत सुंदर है। आंखों को ठंडक मिली।