शुरू में लगा कि यह एक साधारण प्रेम कहानी है, लेकिन जब उस रहस्यमयी स्त्री की आंखें बदलीं, तो रोंगटे खड़े हो गए। तांत्रिक साधु बेचारा कुछ समझ पाता उससे पहले ही जाल में फंस गया। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी में यह मोड़ बहुत ही चौंकाने वाला था। बिस्तर पर वह दृश्य देखकर लग रहा था कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
चांदनी रात और पुरानी इमारत का वातावरण कमाल का था। जब वह बूढ़ा गुरु झरने के पास मंत्र दे रहा था, तो लगा कि कोई जादुई शक्ति जाग रही है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। लाल बिंदुओं का रहस्य अभी तक खुलना बाकी है, पर कलाकारी शानदार है।
पहले वह कोमल लग रही थी, फिर अचानक उसका रूप बदल गया। जब उसने गुरु के शिष्य की कलाई पकड़ी, तो गुस्सा साफ दिख रहा था। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में किरदारों की गहराई देखने लायक है। क्या वह कोई भूत है या कोई श्रापित आत्मा? यह जानने के लिए और भाग देखने होंगे।
तांत्रिक साधु को लगा कि वह मदद कर रहा है, पर वह खुद मुसीबत में फंस गया। उसकी गले में पहनी माला भी उसे नहीं बचा सकी। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी में विश्वासघात का यह पहलू बहुत दर्दनाक है। उम्मीद है वह जल्दी होश में आएगा और बदला लेगा।
हर सीन के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है। वह लाल निशान क्या हैं? बूढ़े बाबा ने क्या चेतावनी दी थी? सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में रहस्य की परतें एक के बाद एक खुल रही हैं। रात के अंधेरे में वह कमरा अब सुरक्षित नहीं लग रहा। देखने वालों को सांस रोककर देखना पड़ेगा।
चुंबन के दौरान लगा कि प्रेम गहरा है, पर अंत में वह पकड़ जानलेवा लग रही थी। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में भावनाओं का यह खेल बहुत खतरनाक है। जब वह रहस्यमयी स्त्री उस पर झुकी, तो लगा कि वह उसकी ऊर्जा चूस रही है। ऐसा लगता है कि यह कोई तांत्रिक विधि हो सकती है।
लकड़ी की बनी वह इमारत और पुराने दीये बहुत पुराने जमाने की याद दिलाते हैं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की सजावट बहुत ही प्रामाणिक लगती है। जब बाहर बारिश या अंधेरा होता है, तो अंदर का डर और बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में कहानी और भी रोचक हो जाती है।
झरने के पास वह वृद्ध गुरु कुछ महत्वपूर्ण बता रहा था, शायद इसी खतरे के बारे में। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में गुरु और शिष्य का रिश्ता भी अहम है। अगर शिष्य ने उनकी बात मान ली होती, तो शायद यह हालत न होती। अब देखना है कि वह कैसे बचता है।
बिना किसी फालतू के संवाद के सीधे मुख्य मुद्दे पर बात होती है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में हर दृश्य का अपना वजन है। शयनकक्ष का वह दृश्य बहुत तेजी से बदला, जिससे दर्शक हैरान रह गए। ऐसे लघु नाटक देखने में बहुत मजेदार लगते हैं।
अभिनय, रोशनी और कहानी सब कुछ जच रहा है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण ने उम्मीदों पर खरा उतरा है। अंत में वह रहस्यमयी स्त्री का चेहरा देखकर डर लगा कि आगे क्या होगा। जालस्थल पर ऐसे कार्यक्रम मिलना सुखद अनुभव है। जल्दी अगला भाग आना चाहिए।