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सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋणवां21एपिसोड

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सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण

अपने गुरु महागुरु के नाम पर, सिद्धगिरि का शिष्य आर्यन शर्मा जीवन-मृत्यु पुस्तक लेकर पहाड़ से उतरता है - ऋण वसूलने के लिए। लोगों का इंसाफ करते हुए, उल्टे कामों में फंसी अपनी भाभी तनु मेहरा को बचाता है। जिद्दी अमीर बेटी जान्हवी शर्मा को अपनी सेविका बनाता है। अपनी भाग्य वाली देवी आराध्या सिंह से मिलता है, और खूबसूरत आत्मा पल्लवी यादव से भी उसकी मुलाकात होती है। लेकिन क्या ये सब ऋण वसूली के बीच संभव है? और आगे क्या होगा?
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा दृश्य

इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस रुक जाती है। जब बंदूकें तानी गईं, तो लगा कि कुछ भी हो सकता है। चमड़े का कोट पहनी महिला का रवैया बहुत प्रभावशाली है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण ने फिर से साबित कर दिया कि वह बेहतरीन नाटक है। उस व्यक्ति के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था जब उसे थप्पड़ मिला। यह दृश्य वास्तव में दिलचस्प है और दर्शकों को बांधे रखता है। हर किरदार ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह निभाई है।

खलनायक का डर

मूंछों वाले आदमी का अभिनय लाजवाब है। उसकी आंखों में हैरानी और गुस्सा दोनों साफ झलक रहे हैं। जब उसने अपने चेहरे पर खून देखा, तो उसका रिएक्शन देखने लायक था। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लगता है। सैनिकों की वर्दी और हथियार उस समय के अनुकूल हैं। पृष्ठभूमि में खड़ी महिलाएं भी डरी हुई लग रही थीं। यह नाटक रोमांच से भरा हुआ है।

शांत योद्धा

सफेद पोशाक में युवक बहुत शांत दिखाई दिया। भीड़ में शोर था, लेकिन वह स्थिर खड़ा था। यह उसकी शक्ति को दर्शाता है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। काले कोट वाली महिला के साथ उसकी जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है। दोनों के बीच कुछ खास समझ है जो बिना बात किए समझ आ जाती है। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय और रोचक बनाया गया है।

भव्य सेट डिजाइन

कमरे का माहौल बहुत गहरा और रहस्यमयी है। नीली कार्पेट और लकड़ी की सजावट उस युग को दर्शाती है। जब गोली चलने की बारी आई, तो सबकी सांसें थम गईं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण का निर्माण स्तर बहुत ऊंचा है। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है। कलाकारों के कपड़े और मेकअप भी बहुत सटीक हैं। यह देखकर लगता है कि हम उसी समय में जी रहे हैं।

न्याय की घड़ी

उस व्यक्ति को जब जमीन पर गिराया गया, तो लगा कि न्याय हो रहा है। उसका अहंकार टूटता हुआ साफ दिख रहा था। भूरे सूट वाले आदमी ने भी अपनी भूमिका अच्छी निभाई। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में ऐसे बदला के दृश्य बहुत सुकून देते हैं। दर्शक ऐसे पलों का ही इंतजार करते हैं। एक्शन और डायलॉग का संतुलन बहुत अच्छा है। यह नाटक हर तरह से देखने लायक है।

महिला किरदार

क्विपाओ पहनी महिला की खूबसूरती और डर दोनों ही साफ थे। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन वह चुप खड़ी थी। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में महिला किरदारों को भी अच्छी तरह दिखाया गया है। वे सिर्फ शिकार नहीं हैं, बल्कि गवाह भी हैं। यह दृश्य भावनाओं से भरा हुआ है। संगीत भी उस समय के हिसाब से बहुत सही था। हर फ्रेम एक तस्वीर की तरह सुंदर है।

अप्रत्याशित मोड़

जब सैनिकों ने राइफल तानी, तो लगा कि अब सब खत्म हो जाएगा। लेकिन कहानी में एक नया मोड़ आया। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की पटकथा बहुत मजबूत है। कोई भी चीज पहले से अनुमान नहीं लगा सकता। काले कोट वाली महिला ने अपनी ताकत दिखाई। उसकी आवाज में दम था और आंखों में चमक। यह नाटक रोमांच और रहस्य का मिश्रण है।

सबक मिलना

उस व्यक्ति के चेहरे पर खरोंच देखकर लगा कि उसे सबक मिला है। वह चिल्ला रहा था लेकिन उसकी एक नहीं चल रही थी। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में खलनायक का अंत ऐसे ही होना चाहिए। दर्शकों को यह पल बहुत पसंद आया होगा। अभिनय में प्राकृतिकता है जो इसे असली बनाती है। सेट डिजाइन भी बहुत शानदार और विस्तृत है।

भीड़ का योगदान

पीछे खड़े लोग भी इस नाटक का हिस्सा लग रहे थे। उनकी प्रतिक्रियाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण थीं। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण में भीड़ के दृश्य भी अच्छे से फिल्माए गए हैं। हर किसी के चेहरे पर अलग भाव थे। कोई डरा हुआ था, तो कोई गुस्से में था। यह जटिलता नाटक को गहराई देती है। निर्देशक ने हर कोने का उपयोग अच्छे से किया है।

आगे की उम्मीद

अंत में जब सब शांत हुआ, तो लगा कि तूफान थम गया है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है। सिद्धगिरि जीवन-मृत्यु ऋण की कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने की उत्सुकता है। कलाकारों की केमिस्ट्री बहुत अच्छी है। यह नाटक आपको सोचने पर मजबूर कर देता है। हर एपिसोड के बाद इंतजार बढ़ जाता है। यह एक बेहतरीन कृति है।