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स्कूल का शेर आदित्यवां7एपिसोड

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स्कूल का शेर आदित्य

अपराध दुनिया छोड़कर आदित्य यादव पढ़ाई के लिए पूर्वनगर के लिली हाई स्कूल आता है, पर यहाँ उसे सिर्फ़ धूम्रपान, मारपीट और गैंगबाज़ी दिखती है। उसकी दोस्ती मनीष तिवारी और सोनम वर्मा से होती है। जब रोहित मल्होत्रा मनीष को अपमानित कर देता है और वह कूद जाता है, तो आदित्य भड़क उठता है और अपनी ताकत दिखाता है। जल्द ही उसे पता चलता है कि सबके पीछे गैंग लीडर करण चौहान है, और दोनों के बीच अंतिम भिड़ंत तय हो जाती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

आदित्य की आंखों का दर्द

आदित्य के चेहरे पर जब वह छत पर अकेला बैठा था, एक अजीब सी खालीपन और निराशा थी। उसने बीयर पी और फिर खुद को कोसने लगा, मानो वह अपनी किस्मत से हार चुका हो। जब वह दूसरे छात्रों को पीटता है, तो लगता है कि वह अपने अंदर के गुस्से को बाहर निकाल रहा है। स्कूल का शेर आदित्य का यह रूपांतरण एक पीड़ित से पीड़क तक, मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत गहरा और प्रभावशाली है।

छत वाला दृश्य और उसका प्रतीक

छत का दृश्य सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। ऊंचाई, अकेलापन, और नीचे गिरने का डर - यह सब आदित्य की मानसिक स्थिति को दर्शाता है। जब वह रेलिंग पर चढ़ता है, तो लगता है कि वह जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है। और जब वह कूदता है, तो यह सिर्फ एक शारीरिक गिरावट नहीं, बल्कि एक सामाजिक पतन है। स्कूल का शेर आदित्य में इस दृश्य का निर्देशन और छायांकन अद्भुत है।

भीड़ की मानसिकता का खुलासा

सबसे डरावना पल वह था जब आदित्य के कूदने के बाद भीड़ हैरान थी, लेकिन कुछ ही पलों में वे फिर से अपने फोन निकालकर वीडियो बनाने लगे। यह दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया की दुनिया में इंसानियत मर जाती है। वे आदित्य के दर्द को सिर्फ एक कंटेंट के रूप में देख रहे थे। स्कूल का शेर आदित्य ने इस भीड़ मानसिकता को बहुत ही बारीकी से उजागर किया है, जो आज के समय में बहुत प्रासंगिक है।

गुंडे का किरदार और उसका प्रभाव

लेदर जैकेट वाला गुंडा का किरदार बहुत ही दबंग और डरावना है। वह छात्रों को घुटनों के बल बैठने के लिए मजबूर करता है और उनकी बेइज्जती करता है। उसकी हरकतें और बातचीत का तरीका यह साबित करता है कि वह स्कूल में आतंक फैलाने वाला है। जब वह आदित्य को पीटता है, तो लगता है कि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। स्कूल का शेर आदित्य में इस विलेन का किरदार बहुत ही प्रभावशाली ढंग से निभाया गया है।

आदित्य का बदला और उसकी कीमत

आदित्य जब वापस आता है और उन छात्रों को पीटता है जिन्होंने उसे बुली किया था, तो उस पल में एक अजीब सा संतोष है। लेकिन साथ ही, यह भी लगता है कि वह खुद को खो रहा है। उसकी आंखों में अब वह मासूमियत नहीं, बल्कि एक खतरनाक चमक है। उसने बदला तो ले लिया, लेकिन क्या वह अपनी इंसानियत तो नहीं खो बैठा? स्कूल का शेर आदित्य की यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर कर देती है।

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