तीनों किरदारों के बीच की केमिस्ट्री कमाल की है। एक तरफ गुस्से में लाल सूट वाला, दूसरी तरफ डरा हुआ जैकेट वाला और बीच में फंसा वो नौकर। स्कूल का शेर आदित्य की कहानी में ये ट्रायंगल बहुत दिलचस्प मोड़ ले रहा है। जब सूट वाले ने उंगली उठाई, तो लगा जैसे बिजली गिर गई हो। ऐसे सीन बार-बार देखने को मिलते हैं, पर हर बार नया लगता है।
वो नीली जैकेट वाला लड़का बेचारा कुछ बोलना चाहता था, पर डर के मारे रुक गया। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे किरदार अक्सर अन्याय के शिकार होते हैं। उसकी आँखों में साफ दिख रहा था कि वो सच बोलना चाहता है, पर मजबूरी उसे चुप रहने पर मजबूर कर रही है। ऐसे सीन देखकर दिल दुख जाता है और कहानी से जुड़ाव और गहरा हो जाता है।
चमड़े की जैकेट पहने शख्स शुरू में बहुत बोल रहा था, पर जैसे ही सूट वाले ने आवाज़ ऊंची की, वो चुप हो गया। स्कूल का शेर आदित्य में ये दिखाता है कि पावर सिर्फ कपड़ों में नहीं, बल्कि व्यक्तित्व में होती है। उसकी घबराहट और हाथों की हरकतें साफ बता रही थीं कि वो अब पछता रहा है। ऐसे मोड़ कहानी को और रोचक बना देते हैं।
पीछे की दीवार पर लगे चेहरों वाले पोस्टर और काले सोफे ने पूरे सीन को एक अलग ही डरावना अंदाज दे दिया। स्कूल का शेर आदित्य के इस एपिसोड में सेट डिजाइन ने कहानी के तनाव को और बढ़ा दिया। जब सूट वाला शख्स गुस्से में इधर-उधर देखता है, तो लगता है जैसे कमरा भी उसके साथ कांप रहा हो। ऐसे विजुअल्स कहानी को यादगार बना देते हैं।
जब काले सूट वाले ने आखिर में मुस्कुराते हुए कंधे पर हाथ रखा, तो लगा जैसे वो कुछ बड़ा प्लान कर रहा है। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे मोड़ अक्सर कहानी को नई दिशा देते हैं। उसकी मुस्कान में डर और धमकी दोनों थीं। नौकर वाला लड़का अब और भी ज्यादा घबरा गया है। ऐसे सीन देखकर अगले एपिसोड का इंतजार और भी बढ़ जाता है।