क्या माहौल था उस क्लासरूम में! जब आदित्य ने अपनी जैकेट ठीक की और सामने बढ़ा, तो लगा जैसे स्कूल का शेर आदित्य ने अपना राजपाट संभाल लिया हो। उसकी हर हरकत में इतना आत्मविश्वास था कि दुश्मन भी पीछे हट गए। बिल्कुल फिल्मों वाले अंदाज़ में।
आदित्य के साथ खड़ा वो लड़का भी कम नहीं था। जब सब डर रहे थे, तब भी वो आदित्य के पीछे खड़ा रहा। स्कूल का शेर आदित्य के साथ ऐसे दोस्त होने से ही तो जीत पक्की होती है। दोस्ती की ये मिसाल हमेशा याद रहेगी। सच्चा दोस्त वही जो मुसीबत में साथ दे।
जब आदित्य ने उस गुंडे को जमीन पर गिराया, तो लगा जैसे स्कूल का शेर आदित्य ने अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया हो। उसकी मुट्ठी में इतनी ताकत थी कि एक ही झटके में सब कुछ बदल गया। ऐसे ही हीरो चाहिए जो अन्याय के खिलाफ खड़े हों।
वो लड़की जो कोने में खड़ी थी, उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। जब आदित्य ने कदम बढ़ाया, तो लगा जैसे स्कूल का शेर आदित्य ने सबकी रक्षा का वादा कर लिया हो। उसकी हरकतों में इतना भरोसा था कि सबकी सांसें थम गईं।
जब मास्टर जी ने आदित्य को डांटा, तो लगा जैसे स्कूल का शेर आदित्य ने अपनी गलती मान ली हो। लेकिन उसकी आंखों में वो चमक थी जो बता रही थी कि वो हार नहीं मानेगा। ऐसे ही हीरो चाहिए जो गलतियों से सीखें और आगे बढ़ें।