सबसे डरावना पल वह होता है जब कोई बोलता नहीं है। यहाँ आदित्य और विपक्षी ग्रुप के बीच कोई डायलॉग नहीं,बस घूरना है। यह साइलेंस चीखने से ज्यादा डरावना है। बैकग्राउंड में हवा की आवाज और दूर खड़ी बिल्डिंग इस सन्नाटे को और गहरा कर रही हैं। स्कूल का शेर आदित्य में ऐसे सीन दिखाते हैं कि डायरेक्टर को अपनी आर्ट पर पूरा भरोसा है।
अगर आप हाई स्कूल ड्रामा और एक्शन पसंद करते हैं,तो स्कूल का शेर आदित्य आपके लिए परफेक्ट है। इस सीन में जो एनर्जी है,वो बड़े बजट वाली फिल्मों में भी कम देखने को मिलती है। किरदारों की बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन सब कुछ बता रहे हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज देखकर मैं हैरान रह गया कि इतनी क्वालिटी कंटेंट अब मोबाइल पर भी मिल रहा है।
स्कूल का शेर आदित्य में सबसे अच्छी बात यह है कि हीरो चिल्लाता नहीं है,बस देखता है। जब सामने वाले ग्रुप के लड़के के मुंह से खून टपक रहा है,तब भी आदित्य का चेहरा पत्थर जैसा है। यह दिखाता है कि असली ताकत शोर में नहीं,शांति में होती है। बैकग्राउंड में स्कूल की बिल्डिंग और ग्रे आसमान माहौल को और भी गंभीर बना रहे हैं। ऐसे किरदार ही दिल जीत लेते हैं।
जब दोनों टीमें आमने-सामने खड़ी होती हैं,तो हवा में बिजली सी दौड़ जाती है। एक तरफ आदित्य और उसके वफादार दोस्त,दूसरी तरफ बाहरी गुंडे जो स्कूल के नियम तोड़ने आए हैं। लड़की जो नीले कपड़ों में है,उसकी आँखों में डर और आदित्य के लिए चिंता साफ दिख रही है। यह सीन बताता है कि दोस्ती के लिए क्या कुर्बानियां दी जाती हैं। नेटशॉर्ट पर यह सीरीज देखना हर युवा के लिए जरूरी है।
डायरेक्टर ने क्लोज-अप शॉट्स का बहुत स्मार्ट इस्तेमाल किया है। जब आदित्य की आँखों में फोकस होता है,तो लगता है वह सामने वाले की आत्मा पढ़ रहा है। फिर जब वाइड शॉट आता है और पूरी भीड़ दिखती है,तो स्केल का अहसास होता है। स्कूल का शेर आदित्य में विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत मजबूत है। हर फ्रेम में एक कहानी छिपी है जो दर्शक को बांधे रखती है।