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लौटकर आया, तो बन गया अपराजेयवां61एपिसोड

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लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय

जिसे परिवार ने ठुकरा दिया था, वही नायक असल में एक अनमोल दिव्य शरीर वाला था। अठारह साल तक उसकी प्रतिभा छुपी रही, और उसने हर अपमान सहा। बस उसकी बचपन की साथी ने उसका साथ नहीं छोड़ा। दस साल के वादे के दिन, उसने एक अखाड़ा खड़ा किया, और उसी की प्रतीक्षा कर रही थी। नायक जब लौटा, तो देखा – उसकी प्रेमिका को जबरन शादी के लिए मजबूर किया जा रहा था, और उसका पुराना दुश्मन उसे सबके सामने अपमानित कर रहा था। यहीं से शुरू हुई उसकी असली पहचान और सबसे ऊपर उठने की कहानी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

काले पोशाक वाले का गुस्सा

काले पोशाक वाले की आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा है। लगता है कोई बड़ी साजिश चल रही है। सफेद वस्त्र वाला शांत खड़ा है, पर उसकी चुप्पी सबसे खतरनाक है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय देखकर लगता है कि यह मुकाबला आसान नहीं होगा। हर किरदार की अपनी कहानी है और यह नाटक बहुत रोचक है।

नीले वस्त्र की चमक

नीले वस्त्र वाले युवक के चेहरे पर अजीब सी चमक है। शायद उसे अपनी शक्तियों का अहसास हो गया है। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन नहीं लग रहे। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। वेशभूषा की रचना भी कमाल की है और मंच भी।

आंगन का तनाव

आंगन का माहौल बहुत तनावपूर्ण है। सब एक दूसरे को घूर रहे हैं। फर वाली गर्दन वाला शख्स हैरान लग रहा है, जैसे कोई राज खुल गया हो। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे दृश्य देखकर मजा आता है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा है और संवाद भी।

ताज वाले का प्रवेश

सिर पर ताज पहने हुए का प्रवेश प्रभावशाली है। उसकी बात सब ध्यान से सुन रहे हैं। लगता है वह इस गुट का मुखिया है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कथा बहुत गहरी है। हर दृश्य में कुछ नया छिपा है। देखने वाले को ध्यान देना पड़ता है।

मूछों वाले के भाव

मूछों वाले किरदार के भाव बहुत डरावने हैं। वह किसी को धमकी दे रहा हो सकता है। सामने वाला डरा नहीं है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे चरमोत्कर्ष बार बार देखने को मिलते हैं। संघर्ष के दृश्यों की उम्मीद बढ़ गई है बहुत ज्यादा।

सफेद पोशाक का रहस्य

सफेद पोशाक वाला शांत खड़ा है पर उसकी आँखें सब देख रही हैं। शायद वह सबसे ताकतवर है। पीछे का मंच सज्जा बहुत असली लगता है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की वजह से मैं इस शैली को फिर से देख रहा हूँ। बहुत पसंद आ रहा है यह श्रृंखला।

कपड़ों की कढ़ाई

सबके कपड़ों में बारीक कढ़ाई है। यह दिखाता है कि निर्माण पर मेहनत हुई है। नीले वाले के हाथ में कुछ नहीं है पर वह तैयार है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी बहुत मजबूत है। हर कड़ी में नया मोड़ आता है देखने को।

पट्टी वाले की मुस्कान

माथे पर पट्टी वाला शख्स मुस्कुरा रहा है। शायद उसे कुछ पता है जो बाकी को नहीं। यह रहस्य बहुत अच्छा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय देखते वक्त समय का पता नहीं चलता। बस देखते रहना चाहता हूँ लगातार। बहुत मजा आ रहा है।

घेरे में खड़े लोग

सब लोग एक घेरे में खड़े हैं। यह किसी द्वंद्व की तैयारी लग रही है। हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की वजह से शाम का मजा दोगुना हो गया। दोस्तों को भी बताना चाहता हूँ इस बारे में। कहानी बहुत अच्छी है।

आखिरी दृश्य की स्थिति

आखिरी दृश्य में सबकी स्थिति बदल गई है। लगता है बातचीत खत्म हो गई है। अब संघर्ष शुरू होगा। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय का यह सत्र सबसे उत्तम है। काश ऐसे और भी श्रृंखला मिलते। बहुत आनंद कर रहा हूँ मैं।