रात के समय बाहर खड़े सफेद बाल वाले गुरु और उनके शिष्य का दृश्य बहुत रहस्यमय लग रहा था। लगता है कोई बड़ी घटना होने वाली है। जब मैंने लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय देखा, तो समझ आया कि यह सिर्फ एक साधारण मुलाकात नहीं है। वातावरण में तनाव साफ झलक रहा था और संगीत भी बहुत प्रभावशाली था।
अकादमी के मुख्य भवन में प्रवेश करते ही उसकी आंखों में चमक थी। वह डरा हुआ नहीं बल्कि उत्साहित लग रहा था। उसकी नीली पोशाक और आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वह कोई साधारण छात्र नहीं है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है जो कहानी को रोचक बनाती है।
सफेद वस्त्रों वाली कन्या का चेहरा भावनाओं से परे था। वह कुछ सोच रही थी या किसी का इंतजार कर रही थी। उसकी खामोशी भी शोर मचा रही थी। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे पल बहुत हैं जो दिल को छू लेते हैं। उसकी आंखों में एक अलग ही कहानी छिपी थी जो दर्शकों को बांधे रखती है।
ज्ञान अकादमी का मुख्य भवन बहुत विशाल और प्राचीन लग रहा था। वहां चल रहे लोगों की भीड़ और पताकाएं दिखाती हैं कि कोई बड़ी प्रतियोगिता होने वाली है। सेट डिजाइन बहुत शानदार है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में दृश्य बहुत सुंदर हैं। देखकर ऐसा लगा कि मैं भी उसी दुनिया का हिस्सा हूं।
जब वह नीली पोशाक वाला युवक मुस्कुराया, तो सब कुछ बदल गया। उसकी मुस्कान में कोई चाल थी या सच्ची खुशी, यह तो आगे चलकर पता चलेगा। ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में यह एक अहम पल था। मुझे यह दृश्य बहुत पसंद आया और बार बार देखने को मन करता है।
काले कवच वाला व्यक्ति गुरु के पास खड़ा था। वह चुपचाप सब देख रहा था। उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। शायद उसे आने वाले खतरे का अहसास था। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में हर छोटे किरदार को भी अच्छे से दिखाया गया है। यह वफादारी देखकर दिल खुश हो जाता है।
पहले दृश्य में रात का अंधेरा और मोमबत्तियों की रोशनी थी, फिर दिन की रोशनी में अकादमी दिखाई दी। यह बदलाव कहानी की गति को बढ़ाता है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में समय का प्रबंधन बहुत अच्छा किया गया है। दर्शक बोर नहीं होते हैं और हर पल नया लगता है।
वह सफेद पोशाक वाली कन्या जब सामने आई, तो सबकी नजरें उसी पर थीं। उसकी सादगी में भी एक तेज था। पीछे खड़ा व्यक्ति भी उसे महत्व दे रहा था। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय में ऐसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मुझे यह पात्र बहुत पसंद आया और इसका अभिनय भी शानदार था।
नेटशॉर्ट ऐप पर यह शो देखना बहुत सुखद रहा। वीडियो की क्वालिटी और साउंड बहुत अच्छे हैं। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय जैसे शो देखकर लगता है कि समय बर्बाद नहीं हुआ। कहानी में दम है और किरदार भी जानदार हैं। मैं इसे अपने दोस्तों को जरूर सुझाऊंगा।
अंत में जब वे एक दूसरे को देख रहे थे, तो लगा कि कोई बड़ी टक्कर होने वाली है। क्या वे दोस्त बनेंगे या दुश्मन? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। लौटकर आया, तो बन गया अपराजेय की कहानी में कई मोड़ हैं जो हैरान कर देते हैं। मैं अगले भाग का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।