कैमरा जब पुरुष के चेहरे पर ज़ूम करता है तो उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी दिखती है। वह टीवी देख रहा है पर उसका ध्यान पूरी तरह से उस महिला पर है जो पानी पी रही है। रूप का धोखा सच में दिलचस्प मोड़ ले रहा है। यह चुप्पी किसी बड़े विस्फोट से पहले की शांति लगती है। माहौल में बिजली सी दौड़ रही है।
महिला का कांच का गिलास पकड़ने का तरीका बहुत कुछ कह जाता है। उसके हाथ कांप रहे हैं या फिर वह गुस्से को रोकने की कोशिश कर रही है? पुरुष का उठकर उसके पास जाना और हाथ पकड़ना, यह सब रूप का धोखा के क्लाइमेक्स जैसा लगता है। लगता है अब कोई बड़ा खुलासा होने वाला है जो सब कुछ बदल देगा।
सेटिंग बहुत ही आधुनिक और महंगी है, बड़ी खिड़कियां, मिनिमलिस्ट फर्नीचर, लेकिन इन दीवारों के पीछे छिपे राज़ बहुत पुराने और गहरे लगते हैं। रूप का धोखा में दिखाया गया यह घर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि पात्रों के मन की स्थिति को दर्शाता है। बाहर से सब कुछ साफ़-सुथरा है, अंदर तूफान मचा है।
पृष्ठभूमि में टीवी पर न्यूज़ चल रही है, जो शायद दुनिया की खबरें बता रही है, लेकिन इस कमरे में असली खबर वह है जो इन दो पात्रों के बीच बिना बोले हो रही है। रूप का धोखा का यह दृश्य बताता है कि कभी-कभी बाहर की दुनिया से ज्यादा शोर अंदर की खामोशी में होता है। विरोधाभास बहुत सुंदर है।
पुरुष का लंबा कोट और महिला की प्लेड जैकेट, दोनों का स्टाइल बहुत क्लासी है। लेकिन कपड़ों की यह सजावट उनके अंदर के तूफान को छिपा नहीं पा रही है। रूप का धोखा में कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने बहुत बारीकी से काम किया है। कपड़े पात्रों की सामाजिक स्थिति तो दिखाते हैं, पर उनकी आँखें उनकी असली कहानी बताती हैं।