उसने जो किया, वह शायद गलत था, लेकिन उसकी आँखों में जो दर्द था, वह साफ दिख रहा था। जब वह चीखी, तो लगा जैसे सालों का गुस्सा एक साथ फूट पड़ा हो। रूप का धोखा में ऐसे पल बहुत हैं जहाँ लगता है कि हर किसी के पास अपनी सच्चाई है। क्या हम किसी को दोष दे सकते हैं जब प्यार ही धोखा बन जाए? मैं तो बस उस लड़की के पक्ष में खड़ी हो गई।
वह कुछ नहीं बोला, बस खड़ा रहा। उसकी चुप्पी में इतना शोर था कि लगता था वह चीख रहा हो। रूप का धोखा की यह सबसे ताकतवर सीन थी। जब वह लड़की गिरी, तो उसकी आँखों में कोई पछतावा नहीं था, बस एक अजीब सी खालीपन था। क्या प्यार इतना बेरहम हो सकता है? मैं तो बस यही सोचती रह गई कि आखिर वह सोच क्या रहा था।
वह हमेशा सफेद कोट वाली के पास खड़ी रही, जैसे एक ढाल बनकर। उसकी आँखों में चिंता थी, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान। रूप का धोखा में ऐसे किरदार बहुत कम हैं जो सच्चे लगें। क्या दोस्ती इतनी मजबूत हो सकती है कि सब कुछ सह ले? मैं तो बस यही सोचती रह गई कि आखिर वह क्यों इतनी वफादार है।
जब वह लड़की जमीन पर गिरी, तो लगा जैसे समय थम गया हो। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर गुस्सा। रूप का धोखा की यह सबसे भावुक सीन थी। क्या प्यार इतना दर्द दे सकता है कि इंसान जमीन पर गिर जाए? मैं तो बस यही सोचती रह गई कि आखिर वह कैसे उठेगी।
उसकी आँखें हमेशा नीची रहती थीं, जैसे कुछ छुपा रही हो। जब वह बोली, तो उसकी आवाज में एक अजीब सी कंपन थी। रूप का धोखा में ऐसे पल बहुत हैं जहाँ लगता है कि सब कुछ सच नहीं है। क्या वह सच में मासूम है या सब कुछ नाटक है? मैं तो बस यही सोचती रह गई कि आखिर वह क्या छुपा रही है।