चित्रण की शुरुआत ही बहुत हैरान कर देने वाली थी जब लड़की एक लोहे के बर्तन के अंदर छिपी हुई थी। सफेद पोशाक वाला लड़का उसे धक्का दे रहा था और उसके कपड़ों पर खून जैसे निशान थे। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार नामक इस शो में ऐसा दृश्य देखकर हंसी भी आई और डर भी लगा। पीछे पोशाक पहने लोग जीवित लाश की तरह दौड़ रहे थे। यह सीन बहुत ही रोमांचक था और कहानी में एक अलग ही जादू भर देता है। दर्शकों को यह पसंद आएगा।
जब सफेद बालों वाला लड़का लड़की के घर उसके माता पिता से मिलने पहुंचा तो माहौल काफी अजीब हो गया। शर्मा जी और उनकी पत्नी हैरान थे लेकिन उन्होंने मेहमान नवाजी दिखाई। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में इस तरह के पारिवारिक दृश्य बहुत दिलचस्प लगते हैं। हाथ मिलाने वाला सीन तो बहुत ही यादगार था जब पिताजी को उसका हाथ ठंडा लगा। यह छोटी छोटी बातें कहानी को आगे बढ़ाती हैं। बहुत ही शानदार प्रस्तुति है।
बीच में अचानक टेबल पर बिस्कुट का पैकेट आना काफी हास्य वाला पल था। माँ ने बहुत ही सामान्य तरीके से नाश्ता परोसने की कोशिश की हालांकि माहौल में तनाव था। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार की कहानी में ऐसे हल्के फुल्के पल भारी भरकम नाटक के बीच राहत देते हैं। लड़की की नीली सलोप और चश्मा उसकी प्यारी व्यक्तित्व को दिखाता है। यह शो देखने में बहुत मजेदार लग रहा है। सबको यह पसंद आएगा।
मुख्य पात्र का रूप बहुत ही यूनिक था। सफेद पोशाक पर लाल रंग के निशान और गले में गुलाब का फूल बहुत सुंदर लग रहा था। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में किरदारों की रचना पर काफी मेहनत की गई है। उसकी आंखों के आसपास लाल शृंगार उसे एक अलग ही पहचान दे रहा था। जब वह लड़की का हाथ पकड़ता है तो लगता है जैसे वह उसे किसी खतरे से बचा रहा हो। यह दृश्य शैली बहुत पसंद आया। वेशभूषा बनाने वाले की तारीफ।
कार्यालय के गलियारे में पीछा करने वाला दृश्य बहुत तेज रफ्तार था। नीले कोट वाला आदमी और उसके साथी बहुत агрессिव लग रहे थे। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में रोमांच और हास्य का मिश्रण बहुत अच्छा है। लड़की डरने के बजाय शांत रही जो उसकी हिम्मत दिखाता है। दृश्य कोण और भागने का तरीका बहुत फिल्मी था। ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं और अगली कड़ी के लिए उत्सुक करते हैं। कार्यवाही बहुत बढ़िया थी।
जब पिताजी ने सफेद बालों वाले लड़के का हाथ छुआ तो वे चौंक गए। ऐसा लग रहा था जैसे उसका शरीर बर्फ जैसा ठंडा हो। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में यह संकेत देता है कि वह कोई आम इंसान नहीं है। लड़की को इस बात की परवाह नहीं थी और वह उसके साथ खड़ी रही। यह प्रेम कहानी में एक नया मोड़ लाता है। क्या वह वास्तव में कोई अलौकिक शक्ति है? यह जानने के लिए पूरा शो देखना पड़ेगा। रहस्य बना हुआ है।
लड़की ने जो नीली सलोप पहनी थी वह बहुत ही प्यारा लग रही थी। उसके बालों में फूल और सिर पर चश्मा उसकी शैली को दिखाता है। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में उसका किरदार बहुत ही सरल और प्यारा है। जब वह अपने माता पिता से बात कर रही थी तो उसकी आवाज में मिठास थी। वह अपने दोस्त के लिए खड़ी होती है जो उसकी वफादारी दिखाता है। ऐसा किरदार दर्शकों को जल्दी पसंद आ जाता है। पहनावा बहुत अच्छा था।
पिता का किरदार निभा रहे शर्मा जी का अभिनय बहुत स्वाभाविक था। जब उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है तो उनका चेहरा बदल गया। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार में बुजुर्ग पात्रों को भी अच्छे से दिखाया गया है। वे अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे लेकिन मेहमान के प्रति शिष्ट भी रहे। यह द्वंद्व बहुत अच्छे से दिखाया गया है। ऐसे दृश्य कहानी को एक असली अहसास देते हैं। अभिनय की दाद देनी होगी।
इस तरह की लघु नाटक श्रृंखला देखना बहुत सुकून देने वाला होता है। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार को नेटशॉर्ट पर देखना एक अच्छा अनुभव रहा। कहानी बहुत लंबी नहीं है लेकिन इसमें सभी जरूरी तत्व हैं। प्रेम, डर और हास्य सब कुछ इसमें शामिल है। जब लड़के और लड़की ने एक दूसरे का हाथ थामा तो पर्दे पर प्यार दिखाई दिया। यह कार्यक्रम समय बिताने के लिए बहुत अच्छा है। एप्लिकेशन का रूप भी अच्छा है।
चित्रण के अंत में जब सब लोग गद्दी पर बैठे तो लग रहा था कि अब बातचीत शुरू होगी। मुर्दा दिल, ज़िंदा प्यार की कहानी अभी शुरू हुई है और बहुत कुछ बाकी है। सफेद बालों वाला लड़का चुपचाप खड़ा था और सब उसे देख रहे थे। यह रहस्य बनाए रखता है कि आगे क्या होगा। क्या माता पिता उसकी असलियत जान पाएंगे? यह सवाल मन में बना रहता है। अगली कड़ी देखने को उत्सुक।