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मेरा जलवा

कावेरी ने अभिषेक को चोरी-छुपे संसाधन देकर बड़ा बनाया। उसने धोखा दिया, दूसरी को अपनी जगह बिठाकर कावेरी को निकाला। कावेरी ने उसका भंडाफोड़ किया, उसे बदनाम किया, फिर खुद बड़ी बन गई। अभिषेक पछताया, पर उसकी चाल पकड़ी गई। अब वह अकेला और बर्बाद है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

आंखों का खेल और खामोशी

बिना एक शब्द बोले ही इतनी कहानी कह दी गई है। चमकीली ड्रेस वाली महिला की मुस्कान के पीछे छिपी चालाकी और लाल जैकेट वाले शख्स की हैरानी देखने लायक है। मेरा जलवा में ऐसे सीन बहुत पसंद आते हैं जहां डायलॉग से ज्यादा एक्सप्रेशन बोलते हैं। टेबल पर रखे हाथों की हलचल भी तनाव को बयां कर रही है।

फैशन और स्टेटस का प्रदर्शन

हर किसी की पोशाक उनकी हैसियत बयां कर रही है। चाहे वो चमकदार गाउन हो या महंगे सूट, सब कुछ बहुत शानदार लग रहा है। मेरा जलवा की यह बैठक किसी फैशन शो से कम नहीं लग रही। पीछे लगा बैनर बता रहा है कि यह कोई बड़ा इवेंट है जहां सबकी नजरें एक दूसरे पर टिकी हैं।

सस्पेंस से भरा पल

जब वो महिला बोलने लगती है तो सबकी सांसें थम सी जाती हैं। लाल सूट वाले युवक की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। मेरा जलवा में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं जो दर्शक को कुर्सी से चिपका देते हैं। लगता है अब कोई बड़ा खुलासा होने वाला है जो सबकी जिंदगी बदल देगा।

पात्रों के बीच की दूरियां

सब एक ही टेबल पर बैठे हैं लेकिन लगता है जैसे हजारों मील की दूरी हो। काले सूट वाला शख्स चुपचाप सब देख रहा है जबकि बाकी लोग आपस में कुछ तय करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा जलवा में रिश्तों की यह जटिलता बहुत गहराई से दिखाई गई है। हर किसी के चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं।

माहौल में छिपा तूफान

बाहर से सब कुछ शांत लग रहा है लेकिन अंदर कुछ बड़ा होने वाला है। प्रेजेंटेशन दे रही महिला की आवाज में आत्मविश्वास है जबकि बैठे हुए लोग असमंजस में हैं। मेरा जलवा का यह सीन बताता है कि कैसे एक कमरे में अलग-अलग दुनियाएं समा सकती हैं। सबकी नजरें एक दूसरे को टटोल रही हैं।

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