एलिस की क्रूरता देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बेचारी लड़की जमीन पर रो रही थी और उसे मशाल से डराया जा रहा था। काश केन जल्दी आ जाता। इस कार्यक्रम बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसा मोड़ नहीं देखा था। अभिनय बहुत वास्तविक लगा। संवाद भी दमदार थे। हर दृश्य में तनाव बना रहा। दर्शक के रूप में मैं हैरान हूं। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था। मुझे लगा कि यह बहुत ज्यादा हो गया। पर नाटक तो चाहिए ही।
डेजी की चुप्पी सबसे ज्यादा चुभती है। वह सब देख रही थी पर मदद नहीं की। शायद उसे भी डर था या कोई मजबूरी थी। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कहानी में यह किरदार महत्वपूर्ण लगता है। केन का गुस्सा साफ दिख रहा था। जब वह कमरे में घुसा तो माहौल बदल गया। मुझे लगता है अब बदलाव आएगा। डेजी को भी बोलना चाहिए था। चुप रहना गलत था।
आग के औजार वाला दृश्य बहुत तनावपूर्ण था। एलिस ने बिना किसी दया के धमकी दी। पीड़ित की आंखों में डर साफ दिख रहा था। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे नाटक में ऐसे दृश्य आम हैं। पर यह वाला कुछ अलग लगा। दृश्य कोण भी बहुत अच्छे थे। निकट के दृश्य ने दर्द को महसूस कराया। आवाजें भी डरावनी थीं। मुझे डर लग रहा था।
केन का आगमन प्रतीक्षित था। वह दूरभाष पर बात करते हुए परेशान लग रहा था। जब उसे एलिस का नाम दिखा तो समझ गया कुछ गड़बड़ है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में रिश्तों की यह उलझन देखने लायक है। जहाज का दृश्य भी शानदार था। अमीरी और गरीबी का फर्क साफ झलकता है। स्थान बहुत सुंदर था। समुद्र किनारे का नज़ारा था।
जमीन पर गिरा खाना और मैली कपड़े। यह सब जानबूझकर किया गया लगता है। एलिस का व्यवहार बहुत खराब था। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की पटकथा में यह संघर्ष जरूरी था। दृश्य बहुत मजबूत हैं। मैंने इस मंच पर कई नाटक देखे हैं पर यह सबसे अलग है। कहानी में दम है। पात्रों के बीच की दुश्मनी साफ है।
डेजी और एलिस की वर्दी देखकर लगता है यह किसी जहाज या होटल का दृश्य है। सत्ता संतुलन बहुत स्पष्ट है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में वर्ग अंतर को दिखाया गया है। केन के आने से कहानी में नया मोड़ आएगा। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है। कहानी बहुत तेज है। बोरियत नहीं होती।
पीड़ित के चेहरे पर लगा खाना और आंसू। कलाकार ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। दर्द असली लग रहा था। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन का कलाकार चयन बहुत सही हुआ है। एलिस का किरदार नकारात्मक भूमिका में है। पर कहानी में ऐसे खलनायक जरूरी होते हैं। मोड़ का इंतजार है। केन क्या करेगा यह देखना है।
दूरभाष की घंटी बजती है और केन का नाम आता है। यह संबंध महत्वपूर्ण है। शायद वह इस लड़की को जानता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में कहानी गहरी होती जा रही है। दृश्य की रोशनी थोड़ी अंधेरी थी जो माहौल के साथ गई। रहस्य बना हुआ है। मैं जानना चाहता हूं आगे क्या होगा। कहानी रोचक है।
एलिस के हाथ में दस्ताने थे। यह दिखाता है कि वह सब कुछ योजना बनाकर कर रही है। सफाई का बहाना या फिर सबूत मिटाना। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसी बारीकियों पर ध्यान देना चाहिए। केन के आगमन ने जान डाल दी। अब देखना है वह क्या करता है। कार्रवाई होने वाली है। मुझे उम्मीद है।
अंत में केन का चेहरा देखकर लगा वह बचाने आएगा। एलिस घबरा गई है। डेजी भी चुप खड़ी है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन का अंत पास लग रहा है। यह लघु नाटक बहुत रोचक है। मैंने पूरा दृश्य बिना आंख मूंदे देखा। बहुत पसंद आया। सबको देखना चाहिए। यह श्रेष्ठ है।