शुरू में जो जहाज दिखाई दिया वो काफ़ी शानदार था, लेकिन कहानी में जो उतार चढ़ाव आया वो दिल दहला देने वाला था। सूट वाला शख्स जब माँ को फोन लगाता है तो कनेक्ट नहीं होता, यहीं से शक शुरू होता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन नामक इस ड्रामे में अमीरी के पीछे छिपी कड़वाहट को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। हर दृश्य में एक अलग ही तनाव है जो दर्शक को बांधे रखती है।
एलिस नाम की महिला का व्यवहार देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने जो लड़की को नीचे गिरा रखा है, वो बेचारी कुछ बोल भी नहीं पा रही है। वर्दी वाली दोनों महिलाएं मिलकर जो कर रही हैं, वो किसी भी इंसानियत के नाते सही नहीं लगता। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे तीव्र ड्रामे देखना एक अलग ही अनुभव है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में जो मोड़ आएंगे वो देखने लायक होंगे।
वीडियो में एक छोटा सा कुत्ता भी दिखाई देता है जो कुर्सी से बंधा हुआ है। ऊपर लिखा था कि जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचा, फिर भी वो दृश्य दिल को छू गया। जब डेजी और एलिस लड़की पर हमला करती हैं, तो कुत्ता भी बेबस होकर देख रहा होता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में जानवरों का इस्तेमाल भावनाओं को बढ़ाने के लिए किया गया है जो काफ़ी असरदार है।
जब हीरो अपने फोन में माँ का नाम देखता है और कॉल कनेक्ट नहीं होती, तो उसके चेहरे का भाव काबिले तारीफ है। उसे समझ आ जाता है कि कुछ गड़बड़ है। यह छोटा सा पल पूरी कहानी की दिशा बदल देता है। ऐसे में जब घर में नौकरानियां ही मालकिन बन जाएं, तो हालात कितने खराब हो सकते हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन बहुत ही गहराई वाली कहानी है।
डेजी नाम की दूसरी महिला ज्यादा कुछ बोलती नहीं है, लेकिन उसकी आंखों में जो खामोशी है वो शोर मचा रही है। वो एलिस का साथ दे रही है, शायद मजबूरी में या फिर साजिश का हिस्सा बनकर। जब वो लकड़ी का डंडा उठाती है तो लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे ड्रामे में हर किरदार का अपना महत्व है जो कहानी को आगे बढ़ाता है।
वो लड़की जो ज़मीन पर गिरी हुई है, उसके चेहरे पर जो दर्द और डर है, वो साफ़ झलक रहा है। उसके कपड़े गंदे हैं और चेहरे पर चोट के निशान हैं। किसी को भी यह देखकर गुस्सा आएगा कि अमीर घर के नौकर इतनी बेरहमी से पेश आ रहे हैं। नेटशॉर्ट पर मिलने वाली बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन कहानी समाज की कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है कि पैसा इंसान को कैसे बदल देता है।
समुद्र के बीच में चलती हुई नाव और उस पर होने वाला यह नाटक काफ़ी रोमांचक है। लगता है कि हीरो को अपनी माँ के बारे में सच्चाई पता चलने वाली है। बीच में जो नौकरानियां हैं, वो किसी दलाल की तरह काम कर रही हैं। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में दिखाया गया यह संघर्ष बहुत ही वास्तविक लगता है। हर दृश्य के बाद जिज्ञासा बढ़ती जाती है कि आगे क्या होगा।
एलिस के हाथ में जब वो लकड़ी का डंडा आता है, तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो जाता है। उसने सफेद दस्ताने पहन रखे हैं जो उसकी ठंडी स्वभाव को दर्शाते हैं। वो बिना किसी दया के हमला करने को तैयार खड़ी है। यह दृश्य दर्शकों के रोंगटे खड़े करने के लिए काफ़ी है। ऐसे तीव्र दृश्य देखकर ही समझ आता है कि बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन कहानी में कितना नाटक छिपा हुआ है।
हीरो वहां मौजूद नहीं है लेकिन उसकी चिंता साफ़ दिख रही है। जब उसे माँ का फोन नहीं लगता, तो वह परेशान हो जाता है। उधर घर में जो हो रहा है, उससे उसे अनजान रखा गया है। यह पुराना अंदाज है लेकिन इस तरह से प्रस्तुति नई लगती है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में पारिवारिक रिश्तों को बहुत बारीकी से दिखाया गया है जो पसंद आया।
इस लघु नाटक का अंत कैसे होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। क्या वो लड़की बच पाएगी या हीरो समय पर पहुंच पाएगा। एलिस और डेजी का अहंकार टूटेगा या नहीं, यह देखना बाकी है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे बेहतरीन सामग्री मिलना सुकून देता है। कुल मिलाकर बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन एक रोचक कहानी है जो अपनी शैली में बेहतरीन काम करती है और दर्शकों को बांधे रखती है।