बूढ़े दादाजी का गुस्सा और पोते की मजबूरी देखकर दिल दहल गया। प्रतिशोध की डोर में यह सीन दिखाता है कि कैसे पारिवारिक दबाव रिश्तों को तोड़ सकता है। दादी का चुप रहना भी एक तरह का संकेत है कि वे सब जानती हैं लेकिन कुछ नहीं कर सकतीं।
उसकी आँखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। जब वह घुटनों पर गिरा तो लगा जैसे उसकी आत्मा टूट गई हो। प्रतिशोध की डोर की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक है क्योंकि वह अपने ही घर में अजनबी बन गया है।
नीली साड़ी वाली दादी की आँखों में आँसू थे लेकिन वे रो नहीं रही थीं। शायद वे जानती थीं कि अब कुछ नहीं बदलेगा। प्रतिशोध की डोर में उनका किरदार सबसे ज्यादा गहरा है क्योंकि वे सब कुछ सहन कर रही हैं बिना कुछ कहे।
भूरे सूट वाला लड़का जब आया तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। लगता है वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। प्रतिशोध की डोर में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा है और यह लड़का उस राज की चाबी हो सकता है।
जब फोन पर मैसेज आया 'तुम्हारे घर में खतरा है' तो दिल की धड़कन रुक गई। प्रतिशोध की डोर में यह पल सबसे ज्यादा डरावना है क्योंकि अब पता चल रहा है कि यह सब एक योजना के तहत हो रहा है।