उस पत्ते से तलवार तोड़ना वाकई कमाल का था। उस साधु की शक्तियां देखकर मैं दंग रह गई। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं जो रोंगटे खड़े कर दें। जोश और ठंडक का अनोखा संगम है यह।
शादी का कार्ड देते समय उस योद्धा की आंखों में छिपा दर्द साफ दिख रहा था। कहानी में गहराई है जो पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली को बाकी कार्यक्रम से अलग बनाती है। बस यही उम्मीद है कि अंत खुशहाल हो। दिल पर चोट लगी देखकर।
अंत में वह लड़की रो रही थी, मन बहुत भारी हो गया। श्रृंगार करते वक्त भी उसका दुख छिपा नहीं रहा था। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की भावनात्मक गहराई लाजवाब है। आंखें नम हो गईं देखकर। कोई सहारा नहीं लगा।
सुनहरी चमक वाले विशेष प्रभाव बहुत शानदार लगे। जब वह ध्यान में बैठा था तो लगा कोई देवता हो। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की दृश्य शैली पर कोई समझौता नहीं किया गया। बजट अच्छा लगा। हर दृश्य सुंदर है।
दोनों के बीच की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। बिना संवाद के ही सब कह दिया। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में अभिनय सच्चा और गहरा है। ऐसे किरदार याद रह जाते हैं। बातें कम थीं।
बांस के जंगल का दृश्य बहुत सुंदर था। प्राकृतिक रोशनी ने जादू कर दिया। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली का हर दृश्य पेंटिंग जैसा लगता है। देखने में बहुत सुकून मिला। वातावरण शांत था।
वह लाल लिफाफा देखकर हैरानी हुई। क्या सच में शादी होने वाली है? पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में कहानी में मोड़ बहुत तेज हैं। अगली कड़ी कब आएगी? बेचैनी बढ़ रही है।
उस बूढ़ी महिला का किरदार भी रहस्यमयी लगा। क्या वह मां है या गुरु? पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में हर किरदार की अपनी कहानी है। पहेली सुलझती नहीं जा रही। कुछ छिपा है।
युद्ध और भावना का संतुलन सही है। न तो ज्यादा मारधाट न ही सिर्फ रोना। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली को देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। नेटशॉर्ट पर मिल गया देखने को। मजा आया।
कहानी में नयापन है जो पुराने तरीके से अलग है। नायक की शांत शक्ति देखने लायक है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली को जरूर देखें। वक्त बर्बाद नहीं होगा। मजा आएगा।