अंतिम संस्कार के बीच खून बहना चौंकाने वाला था। जब उसने तलवार निकाली, तो लगा जैसे कुछ बड़ा होने वाला है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में ऐसा मोड़ पहले नहीं देखा था। फर्श टूटना और हवा में उड़ते लोग बहुत शक्तिशाली लग रहे थे। नायक की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। उसने दर्द को नहीं, बदले को चुना। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था। सब लोग हैरान थे।
काले कपड़े वाली युवती ने जो किया, वह विश्वास से परे था। उसकी आंखों में आंसू थे फिर भी उसने वार किया। इस शो पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में भावनाओं का खेल देखने लायक है। सफेद सूट वाला व्यक्ति हैरान खड़ा था। कहानी में गहराई है। उसका दर्द साफ झलक रहा था। हर किसी के चेहरे पर सवाल थे। क्या यह धोखा था या मजबूरी?
जब जमीन दरक गई, तो सन्न रह गए। यह शक्ति सामान्य नहीं लग रही थी। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली का यह दृश्य यादगार बन गया। स्क्रीन पर रानी जैसी छवि ने रहस्य बढ़ा दिया। सब कुछ इतनी तेजी से बदला कि सांस रुक गई। विशेष प्रभाव का इस्तेमाल बहुत सही जगह हुआ था। नायक की ताकत का अंदाजा अब हुआ है।
खून के निशान और गहने चमक रहे थे। नायक ने दर्द नहीं दिखाया, बस गुस्सा दिखाया। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में रोमांच और नाटक का सही मिश्रण है। अंत में वह पुल पर अकेला चलता गया, जैसे सब खत्म हो गया हो। बहुत गहरा प्रभाव छोड़ा। उसकी चाल में एक अलग ही रौब था। देखने वाले को बांधे रखता है।
उस पात्र की पोशाक बहुत खास थी, काले रंग का जोर था। जब उसने तलवार पकड़ी, तो माहौल बदल गया। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में हर किरदार का अपना वजन है। सफेद कमीज वाले की प्रतिक्रिया सच्ची लग रही थी। कहानी आगे क्या होगी? यह सवाल हर किसी के मन में है। तनाव बना हुआ है।
अंतिम दृश्य में सोने की कुर्सी वाली आकृति ने सबका ध्यान खींचा। वह कौन है? पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में रहस्य की परतें खुल रही हैं। नायक की मुस्कान देखकर लगा वह जीत गया है। यह दृश्य बहुत ही फिल्मी था। लागत बड़ी लग रही है। हर बारीकियों पर ध्यान दिया गया है।
फूलों के बीच यह हिंसक दृश्य विरोधाभासी था। जब लोग हवा में उड़े, तो विशेष प्रभाव शानदार थे। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में दृश्य पर ध्यान दिया गया है। नायक की चाल में एक अलग ही रौब था। देखने वाले को बांधे रखता है। काले सूट वाले का रवैया बहुत खतरनाक लग रहा था।
भावनाओं का उथल-पुथल भरा माहौल था। एक तरफ दुख, दूसरी तरफ हमला। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में कहानी की पकड़ मजबूत है। उस व्यक्ति ने तलवार को ऐसे छुआ जैसे कोई खिलौना हो। ताकत का अंदाजा लग गया। खून की बूंदें गिरती दिखाई दीं। यह पल बहुत भारी था।
बाहर का दृश्य शांत था, अंदर शोर था। पुल पर चलते हुए वह अकेला लग रहा था। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में अकेलेपन को खूब दिखाया गया है। स्क्रीन पर आई तस्वीर ने नया सवाल खड़ा कर दिया। रहस्यमय अंत बहुत अच्छा था। अगले भाग की उम्मीद बढ़ गई है।
हर दृश्य में तनाव बना रहा। कपड़ों से लेकर सेट तक सब कुछ गहरा था। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली ने उम्मीदों पर खरा उतरा है। नायक की आंखों में कहानी छिपी थी। अगला भाग कब आएगा? इंतजार नहीं हो रहा। यह शो देखने लायक है।