वीडियो की शुरुआत में ही सूट धारी योद्धा की आँखों में दर्द साफ़ दिख रहा था। अंत्येष्टि का माहौल और फिर अचानक तलवारों का हमला, सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में ऐसे मोड़ उम्मीद से परे हैं। सोने की चेन वाला योद्धा अपनी शक्तियों का प्रदर्शन कर रहा था।
हवा में तैरती हुई तलवारें देखकर रोंगटे खड़े हो गए। यह दृश्य किसी साधारण नाटक जैसा नहीं लग रहा था। योद्धा कन्याओं का हमला और फिर उनका पीछे गिरना, एक्शन दृश्य बहुत अच्छे बने हैं। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे दृश्य देखने का मज़ा ही अलग है। कहानी में रहस्य गहरा होता जा रहा है।
जब फ्लैशबैक में वह गंदा बालक दिखा, तो दिल दहल गया। शायद यही वजह है कि मुख्य पात्र इतना कठोर हो गया है। उस छोटी बालिका के हाथ में तलवार देखकर हैरानी हुई। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली की कहानी में भावनात्मक गहराई है। हर किसी के अतीत में कोई न कोई राज़ छिपा है।
काले सूट वाले और सोने की चेन वाले के बीच की तनावपूर्ण झड़प देखने लायक थी। गले पकड़ने वाला दृश्य बहुत गंभीर था। पीछे खड़ी योद्धा कन्या की चिंता साफ़ झलक रही थी। यह सिर्फ़ लड़ाई नहीं, बदले की आग है। संवाद कम लेकिन एक्शन ज्यादा है, जो मुझे पसंद आया।
अंत्येष्टि में वृद्धा का चिल्लाना और युवती को पकड़ना, यह दृश्य बहुत नाटकीय था। काले वस्त्रों में लिपटी युवती की आँखों में आँसू देखकर बुरा लगा। परिवार के झगड़े अब सड़क पर आ गए हैं। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में हर किरदार का अपना वजन है। नाटक अपने चरम पर है।
जब उस योद्धा के शरीर से सुनहरी रोशनी निकली, तो सब हैरान रह गए। यह साबित करता है कि यह कहानी साधारण नहीं है। उसने बिना हाथ लगाए सबको गिरा दिया। ऐसे विशेष प्रभाव छोटे बजट में भी अच्छे लग रहे हैं। दर्शक के रूप में यह देखकर रोमांच हुआ।
अंत में तलवार की नोक सीने पर देखकर सांस रुक गई। क्या वह हमला करेंगी या रुक जाएंगी? यह सस्पेंस बनाए रखना आसान नहीं है। काले लिबास वाली योद्धा कन्या की हिम्मत देखने लायक है। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली के अगले भाग का इंतज़ार होगा। कहानी बहुत आगे बढ़ गई है।
हरे और नीले वस्त्रों वाली योद्धा कन्याओं का रूप बहुत जच रहा था। उनके हथियार और अंदाज़ पेशेवर लग रहे थे। हालाँकि वे उस शक्तिशाली योद्धा के आगे टिक नहीं पाईं। फिर भी उनकी बहादुरी की दाद देनी होगी। नेटशॉर्ट मंच पर ऐसे किरदार मिलना दुर्लभ है।
मुख्य पात्र की आँखों में जो आग थी, वह सिर्फ़ गुस्सा नहीं था। यह सालों पुराना बदला लग रहा था। जब वह चिल्लाया, तो पूरा सभा कक्ष गूंज उठा। पुनर्जन्म: मैं ही हूँ महाबली में भावनाओं का ऐसा प्रवाह देखने को मिलता है। हर दृश्य में एक नया मोड़ है जो बांधे रखता है।
शोक की जगह पर युद्ध होना बहुत विचित्र लेकिन रोमांचक था। फूलों की मालाओं के बीच तलवारें चमक रही थीं। यह विरोधाभास कहानी को गहराई देता है। किरदारों के बीच की दुश्मनी अब खुलकर सामने आ गई है। अगला भाग कब आएगा, इसका बेसब्री से इंतज़ार है।