जब वह किताब चेहरे पर रखकर गहरी नींद में सो रहा था तब भी लग रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है। बच्चों पर हमला होते ही उसकी आंखें अचानक खुल गईं। हवा में ऊंची छलांग लगाने का दृश्य बहुत शानदार और रोमांचक था। पिता का बड़ा खेल में ऐसे अप्रत्याशित मोड़ देखकर बहुत मजा आ गया। खलनायक की शक्ति भी कम नहीं थी पर नायक का प्रवेश सच में धमाकेदार रहा। रात का माहौल और जादुई रोशनी ने दृश्य को और भी रोचक बना दिया है।
छोटे बच्चे इतने बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं यह देखकर दिल दहल गया। लड़के और लड़की दोनों ने बिना डरे मुकाबला किया। पर जब सफेद कपड़ों वाला व्यक्ति आया तो राहत मिली। पिता का बड़ा खेल की कहानी में यह रिश्ता बहुत गहरा लग रहा है। बच्चों की आंखों में डर नहीं बल्कि गुस्सा साफ दिख रहा था। ऐसे कार्रवाई वाले दृश्य बार बार देखने को मन करता है और बोरियत नहीं होती।
काले और सुनहरे कपड़ों वाले व्यक्ति की अभिनय शैली बहुत तेज और प्रभावशाली थी। उसकी आंखों में गुस्सा और हाथों में जादू देखकर डर लग रहा था। उसने पूरे आंगन को अपनी शक्ति से हिला दिया। पिता का बड़ा खेल में खलनायक का किरदार बहुत मजबूत दिखाया गया है। नायक से टकराव से पहले ही पता चल गया कि लड़ाई कड़ी होने वाली है। पोशाक की नक्काशी भी बहुत भव्य और आकर्षक लगी।
जब नायक ने हवा में छलांग लगाकर बच्चों को बचाया तो तालियां बज उठीं। धीमी गति में वह दृश्य बहुत खूबसूरत लगा। रात के आसमान और चांदनी में युद्ध का दृश्य जच रहा था। पिता का बड़ा खेल के कार्रवाई क्रम बहुत अच्छे तरीके से रचित किए गए हैं। जमीन पर उतरने के बाद भी तनाव बना रहा। दोनों के बीच की दुश्मनी साफ झलक रही थी और माहौल गर्म था।
शुरुआत में वह किताब क्यों थी यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई। चेहरे पर किताब रखकर सोना कोई आम बात नहीं है। शायद उसमें कोई गुप्त मंत्र या राज छिपा हो। पिता का बड़ा खेल में ऐसे छोटे विवरण बहुत गहराई जोड़ते हैं। जब वह उठा तो उसकी आंखों में नींद नहीं बल्कि चेतना थी। यह संकेत मिल गया कि असली खेल अब शुरू हुआ है और रोमांच बढ़ गया।
हाथों से निकलने वाली नीली और गुलाबी रोशनी बहुत अद्भुत लग रही थी। बच्चों के पास भी कुछ शक्तियां हैं यह स्पष्ट हो गया। खलनायक की काली शक्ति के सामने यह रोशनी उम्मीद की किरण थी। पिता का बड़ा खेल में दृश्य प्रभावों का इस्तेमाल बहुत सही जगह हुआ है। रात के अंधेरे में यह रोशनी दृश्य को जीवंत बना रही थी। देखने वाले को बांधे रखने के लिए काफी है।
नायक ने बच्चों को पीछे करके खुद आगे खड़ा हो गया। यह देखकर लगा कि वह उनकी सुरक्षा के लिए कुछ भी कर सकता है। बच्चों ने भी उसका साथ नहीं छोड़ा। पिता का बड़ा खेल में परिवार के बंधन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। खलनायक की धमकियों के आगे वह डटा रहा। ऐसे दृश्य दर्शकों के दिल को छू लेते हैं और कहानी से जोड़ते हैं।
लकड़ी का घर और पुराने दीये बहुत सुंदर लग रहे थे। रात के समय यह सजावट रहस्यमयी माहौल बना रही थी। फूलों वाले पेड़ भी पृष्ठभूमि में दिखाई दिए। पिता का बड़ा खेल का स्थान चुनने में बहुत मेहनत की गई है। ऐसा लग रहा था कि हम किसी प्राचीन कहानी का हिस्सा हैं। हर कोने से इतिहास झलक रहा था और कार्रवाई को और भी भारी बना रहा था।
जब दोनों एक दूसरे के सामने आए तो हवाएं थम सी गईं। खलनायक के हाथ में दर्द था पर वह रुका नहीं। नायक की मुद्रा से साफ था कि वह पीछे नहीं हटेगा। पिता का बड़ा खेल का अंत अब पास आता लग रहा है। संवाद कम थे पर आंखों की बातचीत सब कह रही थी। ऐसे रहस्य वाले पल सबसे ज्यादा रोमांचक होते हैं और बार बार देखने को मजबूर करते हैं।
इस मंच पर यह श्रृंखला देखना बहुत अच्छा अनुभव रहा। कहीं भी और कभी भी देख सकते हैं। कहानी की रफ्तार बिल्कुल सही है न धीमी न तेज। पिता का बड़ा खेल जैसे कार्यक्रम इसकी शान हैं। चित्र की गुणवत्ता भी साफ है और ध्वनि प्रभाव दमदार हैं। शाम के समय बैठकर देखने का मजा ही अलग है। सबको जरूर देखना चाहिए और इसका आनंद लेना चाहिए।