अर्जुन राठौड़ की अभिनय क्षमता देखकर लगता है कि वो सच में संघर्ष कर रहे हैं। बच्चों के साथ उनका संवाद बहुत प्यारा लगा। जब उन्होंने वो पुस्तक दी तो लगा कहानी में कुछ बड़ा होने वाला है। पिता का बड़ा खेल में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं। जुए के घर का वातावरण बहुत तनावपूर्ण था।
देवेंद्र राठौड़ की दाढ़ी और उनकी गंभीर मुद्रा देखकर ही समझ आ जाता है कि वो कितने शक्तिशाली हैं। महावीर के साथ उनकी बातचीत में कुछ छिपा हुआ लग रहा था। ऊपर से जुए की मेज को देखना एक अलग ही अनुभव था। पिता का बड़ा खेल की कहानी धीरे-धीरे खुल रही है। पत्तों से लड़ना बहुत अनोखा लगा।
जुए की मेज पर छल का वो दृश्य बहुत ही सस्पेंस से भरा था। जब वो खिलाड़ी पासा फेंकता है तो लगता है सब कुछ तय हो चुका है। अर्जुन राठौड़ की चालाकी देखकर मज़ा आ गया। ऐसे नाटक में हर पल नया मोड़ लेता है। पिता का बड़ा खेल देखते वक्त समय का पता ही नहीं चलता। बजट भी अच्छा लगा।
महावीर संप्रदाय के रक्षक हैं पर उनकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। देवेंद्र राठौड़ से उनकी बातचीत में गहराई थी। लगता है कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। जब पत्ते हवा में उड़े तो रोमांच बढ़ गया। पिता का बड़ा खेल में युद्ध के दृश्यों की कमी नहीं है। विशेष प्रभाव भी काफी अच्छे लगे।
बच्चों ने जब पत्थर दिए तो अर्जुन राठौड़ के चेहरे पर जो मुस्कान थी वो दिल जीत लेने वाली थी। लगता है वो उनके लिए कुछ खास करने वाले हैं। शहर का नज़ारा बहुत सुंदर था। पिता का बड़ा खेल की छायांकन पर काफी मेहनत की गई है। हर कोने से कहानी झांक रही है।
जब वो ताश सीधा माथे पर लगा तो सच में चौंक गया। ऐसा युद्ध पहले कभी नहीं देखा। महावीर की प्रतिक्रिया देखकर लगा कि वो कुछ जानते हैं। जुए के अड्डे का माहौल बहुत गंदा और खतरनाक दिखाया गया है। पिता का बड़ा खेल में हर पात्र अपनी जगह अहम है। अंत का इंतज़ार रहेगा।
देवेंद्र राठौड़ की पोशाक और उनका ठाठ बहुत शाही लग रहा था। वो ऊपर बालकनी से सब देख रहे थे जैसे कोई खेल हो। अर्जुन राठौड़ नीचे खेल रहे थे। ये ऊपर नीच का खेल बहुत गहरा लग रहा है। पिता का बड़ा खेल में शक्ति का संतुलन बहुत अच्छे दिखाए गए हैं। कौन किसका शत्रु है पता नहीं चल रहा।
जुए की मेज पर बैठे लोगों के चेहरे के भाव बहुत सही पकड़े गए हैं। कोई डरा हुआ है तो कोई घमंडी लग रहा है। अर्जुन राठौड़ बीच में फंसे हुए हैं। लगता है वो फंसते जा रहे हैं। पिता का बड़ा खेल की पटकथा बहुत मज़बूत लग रही है। संवाद भी दमदार थे। हर दृश्य में कुछ न कुछ है।
जब महावीर ने तलवार निकाली तो लगा अब लड़ाई होगी। पर पत्तों से वार हो गया। ये जादुई शक्तियां हैं या कलाबाजी। देवेंद्र राठौड़ चुपचाप सब देख रहे थे। उनकी खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। पिता का बड़ा खेल में रहस्य बहुत गहरा है। अगला भाग कब आएगा।
शुरुआत का हवाई दृश्य बहुत शानदार था। पूरा शहर सोया हुआ लग रहा था। फिर धीरे-धीरे शोर बढ़ता गया। अर्जुन राठौड़ की प्रवेश धमाकेदार था। बच्चों से लेकर जुए तक का सफर बहुत रोमांचक था। पिता का बड़ा खेल देखने के बाद मन नहीं भर रहा है। नेटशॉर्ट पर ऐसे शो मिलना दुर्लभ है।