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गिरोह की आखिरी मालकिनवां22एपिसोड

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गिरोह की आखिरी मालकिन

नायिका अपने प्रेमी को बचाने के लिए जेल की गाड़ी लूट लेती है और काली जेल में ठूंस दी जाती है। वहाँ उसे एक रहस्यमयी विरासत मिलती है, और अपनी ताकत से सभी कैदियों को वश में कर लेती है। सब उसे 'गिरोह की मालकिन' कहकर बुलाने लगते हैं। जब वह जेल से बाहर निकलकर सागर नगर लौटती है, तो उसे पता चलता है कि उसका मंगेतर पहले ही शादी कर चुका है। गुस्से में वह उन सबको सबक सिखाती है जो उसे तुच्छ समझते थे। लोग उसे हल्के में लेते हैं, पर उन्हें नहीं पता कि उसका एक और रूप है – स्वतंत्र गिरोह की मालकिन।
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इस एपिसोड की समीक्षा

काले कोट वाली की ठंडक

काले कोट वाली की आंखों में एक अलग ही ठंडक है। सामने खड़ा गुंडा नेता चिल्ला रहा है, पर उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा। लगता है इस बार कोई बड़ा खेल होने वाला है। गिरोह की आखिरी मालकिन का ये अंदाज खतरनाक लग रहा है। पीछे खड़ी भीड़ की सांसें थमी हुई हैं। खुदाई मशीन का होना इशारा करता है कि जमीन का विवाद गहरा है। बंधक बने लोग बेचारे कुछ बोल भी नहीं सकते। इस सीन में जो तनाव है वो रीढ़ की हड्डी में सिहरन पैदा करता है। हर कोई जानना चाहता है कि अगला कदम कौन उठाएगा। सस्पेंस बना हुआ है। दर्शक बंधे हैं।

गुस्से में भारी व्यक्ति

भारी शरीर वाला व्यक्ति बहुत गुस्से में दिख रहा है। वह उंगली उठाकर धमकी दे रहा है, पर सामने वाली टीम डरी हुई नहीं लगती। सफेद कपड़ों वाले बूढ़े की एंट्री ने माहौल बदल दिया। गिरोह की आखिरी मालकिन कहानी में अब नया मोड़ आएगा। बंधक बनाए गए जोड़े की हालत देखकर दिल दहल जाता है। उनके मुंह पर कपड़ा बंधा है और वे बेबस हैं। जंगल के बीच ये मुलाकात किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं लगती। धूल और मिट्टी के बीच ये जंग किसके हक की है, ये तो वक्त ही बताएगा। सबकी नजरें एक दूसरे पर टिकी हैं। माहौल गर्म है।

पावर डायनामिक्स कमाल के

इस वीडियो में जो पावर डायनामिक्स दिखाए गए हैं वो कमाल के हैं। एक तरफ भीड़ और शोर है, दूसरी तरफ खामोशी और ताकत। काले कोट वाली बिना कुछ बोले ही अपना रुतबा दिखा रही हैं। गिरोह की आखिरी मालकिन का किरदार निभाने वाले का अभिनय लाजवाब है। पीछे खड़ा एक्सकेवेटर बता रहा है कि ये सिर्फ बातचीत नहीं, जमीन कब्जे की लड़ाई है। भीड़ में खड़े आम लोग डरे हुए हैं पर कुछ करने को मजबूर नहीं। जब बूढ़ा व्यक्ति आया तो सबकी नजरें उस पर गईं। लगता है वो किसी पुराने राज को जानते हैं। कहानी आगे बढ़ेगी।

तनाव से भरा माहौल

माहौल में जो तनाव है वो साफ महसूस किया जा सकता है। दो गुट आमने सामने हैं और बीच में बेगुनाह लोग फंसे हुए हैं। हरे सूट वाला व्यक्ति और उसके साथ वाली की हालत खराब है। गिरोह की आखिरी मालकिन की एंट्री से पहले ही हंगामा शुरू हो चुका था। काले जैकेट वाला नेता खुद को बहुत ताकतवर समझ रहा है। पर असली ताकत तो सामने खड़ी खामोश टीम में है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखने का मजा ही अलग है। हर फ्रेम में कुछ नया होता है। ये कहानी आगे क्या रूप लेगी, ये देखने लायक होगा। सब इंतजार कर रहे हैं।

गांव के बीचोंबीच जमावड़ा

गांव के बीचोंबीच ये जो जमावड़ा हुआ है, ये किसी साधारण झगड़े जैसा नहीं लगता। सबके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। काले कोट वाली की पोजीशन बहुत मजबूत है। गिरोह की आखिरी मालकिन के प्लॉट में ये सीन टर्निंग पॉइंट साबित होगा। जो व्यक्ति छड़ी पकड़े हुए है, वो भी किसी कम ताकत का नहीं लग रहा। धूप खिली है पर माहौल में अंधेरा छाया हुआ है। बंधकों की आंखों में डर साफ झलक रहा है। क्या अब छुटकारा मिलेगा या मुसीबत बढ़ेगी? ये सवाल हर दर्शक के मन में है। जवाब मिलना बाकी है।

एक्शन और ड्रामे का मिश्रण

एक्शन और ड्रामे का ये मिश्रण बहुत गजब का है। एक तरफ गुंडागर्दी है तो दूसरी तरफ ठहराव। काले कोट वाली की आंखों में गुस्सा नहीं, बस एक ठंडा इरादा दिख रहा है। गिरोह की आखिरी मालकिन की कहानी में ऐसे मोड़ ही जान डालते हैं। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन नहीं, गवाह भी हैं। सफेद लिबास वाले बुजुर्ग की एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया। लगता है वो किसी पुराने हिसाब को चुकता करने आए हैं। मिट्टी के रास्ते पर ये जंग यादगार बनने वाली है। सबकी सांसें रुकी हुई हैं। नतीजा क्या होगा।

वीडियो की शुरुआत तनावपूर्ण

वीडियो की शुरुआत ही इतने तनाव के साथ होती है कि बंदा बंध जाता है। भारी व्यक्ति की आवाज में गुस्सा साफ झलक रहा है। पर सामने वाली टीम हिलने वाली नहीं है। गिरोह की आखिरी मालकिन का ये अंदाज दर्शकों को पसंद आ रहा है। बंधक बनाए गए लोगों की हालत देखकर गुस्सा आता है। उनके मुंह पर रुमाल बंधे हैं और वे कुछ बोल नहीं पा रहे। जंगल के रास्ते पर ये मुठभेड़ किसी बड़े हादसे का संकेत दे रही है। क्या पुलिस आएगी या कोई और इंतजाम होगा? ये सस्पेंस बना हुआ है। सब देख रहे हैं।

हर किरदार का वजन

इस सीन में हर किरदार का अपना वजन है। भीड़ में खड़ा हर व्यक्ति कुछ न कुछ सोच रहा है। काले कोट वाली की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। गिरोह की आखिरी मालकिन के किरदार में जो दम है वो कमाल का है। एक्सकेवेटर का होना बताता है कि ये जमीन का मामला गंभीर है। हरे सूट वाले व्यक्ति की हालत देखकर तरस आता है। वो कुछ करना चाहता है पर मजबूर है। ये कहानी आगे बढ़कर क्या रूप लेगी, ये देखना बाकी है। हर पल नया ट्विस्ट आ रहा है। मजा आ रहा है।

शहरिया कपड़े गांव में

गांव के माहौल में ये शहरिया कपड़े पहने लोग अलग ही लग रहे हैं। काले कोट वाली की पर्सनालिटी बहुत स्ट्रॉन्ग है। गिरोह की आखिरी मालकिन की वजह से ये विवाद और भी उलझ गया है। सामने खड़ा गुंडा नेता अब क्या करेगा, ये देखने वाली बात है। बूढ़े व्यक्ति के आने से सबकी नजरें बदल गई हैं। लगता है वो किसी पुराने रिश्ते को जानते हैं। बंधकों की आंखों में उम्मीद जगी है या निराशा, ये पता नहीं चल रहा। माहौल में बिजली सी कड़क है। सब कुछ शांत पर खतरनाक है। डर बना हुआ है।

दमदार सीन का अंत

अंत में ये कहना गलत नहीं होगा कि ये सीन बहुत ही दमदार है। हर एक्टर ने अपने रोल को पूरी ईमानदारी से निभाया है। काले कोट वाली की लीडरशिप सबके सामने है। गिरोह की आखिरी मालकिन का ये सीन हिट होने वाला है। पीछे खड़ी भीड़ की रिएक्शन भी बहुत नेचुरल हैं। लगता है ये किसी बड़े क्लाइमेक्स की शुरुआत है। धूल मिट्टी के बीच ये ड्रामा देखने में बहुत असली लगता है। क्या अब बंधक आजाद होंगे? ये सवाल बना हुआ है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट की कमी है। सबको पसंद आएगा।