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असली वारिस, सच्ची जीतवां7एपिसोड

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असली वारिस, सच्ची जीत

अनाथालय में पली सुस्मिता जब वर्मा परिवार की असली बेटी निकलती है, तो अपनी लैब के लिए फंडिंग पाने वापस लौटती है और आदिती वर्मा बन जाती है। घर में जय और अनन्या के तानों के बावजूद, वह अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित करती है। ईर्ष्या में अनन्या उसकी रिसर्च लीक करने और विस्फोटक उड़ाने की कोशिश करती है, लेकिन आदिती उसे हर बार विफल कर देती है। अंत में आदिती परिवार की असली उत्तराधिकारी बनती है और अनन्या को सजा मिलती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

धमाकेदार शुरुआत

शुरुआत ही धमाकेदार हुई जब लाल सूट वाले ने वाइन ग्लास तोड़ दिया। गुस्सा साफ दिख रहा था उसके चेहरे पर। नीली पोशाक वाली लड़की बिल्कुल शांत खड़ी थी। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे मोड़ देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बहुत ही तीव्र दृश्य था यह।

नीली आंखों का रहस्य

जब उस लड़की की आंखें नीली चमकने लगीं, तो मैं हैरान रह गया। यह कोई साधारण नाटक नहीं लग रहा था। अलौकिक शक्ति का इशारा मिल रहा था। लाल सूट वाले को शायद नहीं पता था कि उसे किससे पंगा ले लिया है। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में यह मोड़ बहुत गजब का था।

तकनीक या जादू

हृदय गति यंत्र वाला दृश्य बहुत अनोखा था। एक सौ पचासी धड़कन पर मिनट और नब्बे नौ दशमलव नौ प्रतिशत बीमारी का खतरा। यह तकनीक या जादू था? फिल्म में यह दृश्य प्रभाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे तत्व कहानी को नया आयाम देते हैं। दिल की धड़कन तेज हो गई देखकर।

अचानक गिरावट

लाल सूट वाला अचानक जमीन पर गिर गया और सब लोग घबरा गए। जो लड़की शांत खड़ी थी, वही अब उसकी मदद कर रही थी। रिश्तों की यह उलझन बहुत दिलचस्प है। क्या वह उसे बचा पाएगी? असली वारिस, सच्ची जीत में हर पल नया रहस्य बना रहता है। देखने वाले की सांसें रुक जाती हैं।

डॉक्टर की दौड़

डॉक्टर के भागते हुए आने का दृश्य बहुत आपातकालीन था। सबकी सांसें थम गई थीं। बंगले के बाहर का माहौल एकदम से बदल गया। समारोह से लेकर चिकित्सा आपातकालीन स्थिति तक का सफर बहुत तेज था। असली वारिस, सच्ची जीत की रफ्तार देखते ही बनती है। हर कोई चिंतित दिखाई दे रहा था।

गुस्से का नतीजा

लाल सूट वाले और नीली पोशाक वाली के बीच की नोकझोक देखने लायक थी। उंगली उठाने का इशारा बहुत भारी पड़ा। गुस्से में इंसान क्या कुछ नहीं कर जाता। असली वारिस, सच्ची जीत में भावनात्मक नाटक बहुत गहराई से दिखाया गया है। किरदारों का मेल बहुत मजबूत है।

खूबसूरत सेट

बंगला और बगीचे की सज्जा बहुत खूबसूरत थी, लेकिन कहानी में तनाव बहुत ज्यादा था। फूलों के बीच यह नाटक बहुत अलग लग रहा था। पृष्ठभूमि में लोग क्या सोच रहे होंगे? असली वारिस, सच्ची जीत का निर्माण मूल्य बहुत उच्च लग रहा है। दृश्य की बनावट बहुत शानदार है।

दर्द का अहसास

जब उसने अपनी छाती पकड़ी, तो समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। दर्द साफ झलक रहा था उसके चेहरे पर। पहले गुस्सा और फिर अचानक कमजोरी। असली वारिस, सच्ची जीत में किरदारों की हालत बहुत बारीकी से दिखाई गई है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा था।

भीड़ की घबराहट

भीड़ की प्रतिक्रिया बहुत असली लग रही थी। सब लोग हैरान और डरे हुए थे। एक पल में सब कुछ बदल गया। यह कार्यक्रम दर्शकों को बांधे रखता है। असली वारिस, सच्ची जीत में ऐसे रहस्य बहुत अच्छे लगते हैं। अगला भाग देखने की जल्दी हो रही है।

रहस्यमयी अंत

आखिर में लड़की का चेहरा बहुत रहस्यमयी लग रहा था। क्या उसने कुछ किया या यह संयोग था? सवाल बहुत सारे हैं। असली वारिस, सच्ची जीत की कहानी में बहुत गहराई है। यह सिर्फ एक नाटक नहीं, एक पहेली है। देखने में बहुत मजा आ रहा है।